Mayawati Sarvajan Hitay Sarvajan Sukhay: बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन पर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का शंखनाद कर दिया है। लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के अपने पुराने फार्मूले को दोहराते हुए ब्राह्मण, क्षत्रिय और यादव समाज को साधने की कोशिश की। उन्होंने भाजपा, सपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधते हुए दावा किया कि केवल बसपा शासन में ही हर वर्ग को वास्तविक सम्मान और सुरक्षा मिल सकती है। इस अवसर पर उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘ब्लू बुक’ के 21वें संस्करण का विमोचन भी किया और कार्यकर्ताओं को चुनाव की तैयारी में जुटने का कड़ा संदेश दिया।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को लखनऊ में अपना 70वां जन्मदिन ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के रूप में मनाया। इस मौके पर उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया ‘चुनावी दांव’ चलते हुए समाज के सभी वर्गों, विशेषकर ब्राह्मणों और क्षत्रियों को जोड़ने का प्रयास किया।
ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज को साधने की कोशिश
Mayawati ने पिछले शीतकालीन सत्र का संदर्भ देते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज के विधायक अपनी उपेक्षा से नाराज हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी पार्टियां ब्राह्मणों को केवल ‘बाटी-चोखे’ तक सीमित रखती हैं, जबकि बसपा उन्हें सत्ता में वास्तविक भागीदारी देती है। उन्होंने वादा किया कि यदि 2027 में बसपा की सरकार बनती है, तो 2007 की तरह ही ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्य समाज की आकांक्षाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
सपा के ‘PDA’ पर कड़ा प्रहार
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे को उन्होंने एक छलावा करार दिया। उन्होंने 1995 के गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाते हुए कहा कि सपा ने हमेशा दलितों का उत्पीड़न किया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सपा सरकार में मान्यवर कांशीराम की मृत्यु पर राजकीय शोक तक घोषित नहीं किया गया था, जो उनके दलित विरोधी चेहरे को दर्शाता है।
प्रमुख चुनावी वादे और घोषणाएं:
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यादव और जाट समाज: उन्होंने सपा के कोर वोटर यादव समाज और पश्चिमी यूपी के जाटों को भरोसा दिलाया कि बसपा उनके हितों की रक्षा करेगी।
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ईवीएम पर सवाल: मायावती ने एक बार फिर ईवीएम (EVM) पर अविश्वास जताते हुए इसे चुनावी पारदर्शिता के लिए खतरा बताया।
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ब्लू बुक का विमोचन: उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘मेरे संघर्षमय जीवन एवं बीएसपी मूवमेंट का सफरनामा’ (ब्लू बुक) के 21वें संस्करण का विमोचन किया।
Mayawati ने अंत में भावुक अपील करते हुए कहा कि वह अपनी अंतिम सांस तक दलितों और पिछड़ों के हक के लिए लड़ती रहेंगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर बसपा की नीतियों का प्रचार करें ताकि प्रदेश में पांचवीं बार उनकी सरकार बन सके।









