Ajit Pawar Death News: महाराष्ट्र की सियासत के एक युग का दुखद अंत हो गया है। उपमुख्यमंत्री और एनसीपी (अजित गुट) के प्रमुख अजित पवार का बुधवार सुबह बारामती में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। 66 वर्षीय पवार जिला परिषद चुनाव प्रचार के लिए जा रहे थे, जब उनका निजी विमान लँडिंग के दौरान क्रैश हो गया। इस हादसे में उनके साथ सवार सुरक्षाकर्मी और क्रू सदस्यों सहित सभी 5 लोगों की जान चली गई। अजित पवार, जिन्हें ‘दादा’ के नाम से जाना जाता था, अपने कड़े अनुशासन और प्रशासनिक पकड़ के लिए प्रसिद्ध थे। उनके आकस्मिक निधन से राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई दिग्गज नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
Shocking & tragic
Maharashtra Deputy CM Ajit dada Pawar ji DEAD !!
He went by chartered flight from Mumbai to Baramati today morning
The plane crash landed in Baramati, his karmabhoomi & burst into flames 🔥
DGCA confirms no survivors
5 people – 3 passengers 1 pilot 1 crew… pic.twitter.com/OQDnPz8cgE
— PallaviCT (@pallavict) January 28, 2026
सियासी सफर: बारामती से सत्ता के शिखर तक
Ajit Pawar का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर में हुआ था। उनके पिता अनंतराव पवार फिल्म जगत से जुड़े थे, लेकिन अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में राजनीति की राह चुनी।
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शुरुआत: 1982 में उन्होंने पहली बार एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड से अपना सफर शुरू किया।
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संसदीय करियर: 1991 में वे पहली बार बारामती से सांसद बने, लेकिन बाद में उन्होंने यह सीट अपने चाचा के लिए छोड़ दी।
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विधायक की अटूट पारी: 1995 से लेकर 2024 तक, वे लगातार 7 बार बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए।
रिकॉर्ड 6 बार उपमुख्यमंत्री
अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहे। वे राज्य के इकलौते ऐसे नेता हैं जिन्होंने रिकॉर्ड 6 बार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
| वर्ष | मुख्यमंत्री | राजनीतिक गठबंधन |
| 2010 | पृथ्वीराज चव्हाण | कांग्रेस-एनसीपी |
| 2019 | देवेंद्र फडणवीस | बीजेपी-एनसीपी (80 घंटे की सरकार) |
| 2019 | उद्धव ठाकरे | महाविकास अघाड़ी (MVA) |
| 2023 | एकनाथ शिंदे | महायुति (बीजेपी-शिवसेना) |
| 2024 | देवेंद्र फडणवीस | महायुति सरकार |
चाचा की छाया से बगावत तक
Ajit Pawar ने सालों तक शरद पवार के वफादार के रूप में काम किया, लेकिन 2022-23 में उन्होंने अपनी अलग लकीर खींची। जब पार्टी के भीतर उत्तराधिकार को लेकर मतभेद बढ़े, तो उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के एक बड़े धड़े के साथ पाला बदलकर बीजेपी-शिंदे गठबंधन में शामिल होने का फैसला किया। बाद में चुनाव आयोग ने उनके गुट को ही असली ‘NCP’ और ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया।
“अजित पवार को उनके प्रशासनिक कौशल और सुबह 7 बजे से काम शुरू करने वाले अनुशासित स्वभाव के लिए हमेशा याद रखा जाएगा।”
