Swaminarayan Akshardham Temple में स्थापित 108 फीट ऊंची एक पैर पर खड़ी मूर्ति इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मूर्ति की ऊंचाई, संतुलन और अनोखी मुद्रा को देखकर लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं—आखिर यह मूर्ति किसकी है और इतनी ऊंचाई पर एक पैर पर खड़े होने के बावजूद यह स्थिर कैसे रहती है?
नीलकंठ वर्णी की है यह विशाल मूर्ति
यह मूर्ति Swaminarayan के बालयोगी रूप नीलकंठ वर्णी की है। नीलकंठ वर्णी ने मात्र 11 वर्ष की आयु में घर छोड़कर आध्यात्मिक यात्रा शुरू की थी और लगभग 12 हजार किलोमीटर का लंबा पैदल सफर तय किया था। इस दौरान उन्होंने नेपाल के मुक्तिनाथ क्षेत्र में कठोर तपस्या की, जहां वे लंबे समय तक एक पैर पर खड़े होकर और दोनों हाथ ऊपर उठाकर ध्यान में लीन रहे। अक्षरधाम मंदिर में स्थापित यह मूर्ति उसी तपस्या मुद्रा को दर्शाती है, जो इसे विशेष और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।
एक पैर पर खड़ी 108 फीट ऊंची मूर्ति कैसे संतुलित है?
इतनी ऊंची मूर्ति का एक पैर पर खड़ा होना लोगों के लिए आश्चर्य का विषय है। आमतौर पर बड़ी मूर्तियों का आधार चौड़ा बनाया जाता है, लेकिन इस मूर्ति को वर्टिकल कैंटीलीवर स्ट्रक्चर तकनीक के सिद्धांत पर तैयार किया गया है।यह मूर्ति पंचधातु से बनाई गई है, जिसमें तांबे का अधिक उपयोग किया गया है। इसके अंदर मजबूत धातु का फ्रेम लगाया गया है, जो जमीन के अंदर बने गहरे कंक्रीट ढांचे से सीधे जुड़ा हुआ है। यही आंतरिक ढांचा मूर्ति को संतुलन और मजबूती प्रदान करता है, जिससे तेज हवा या मौसम के असर के बावजूद यह स्थिर रहती है।
मंदिर की मजबूत नींव भी है खास वजह
करीब 100 एकड़ परिसर में फैले अक्षरधाम मंदिर का निर्माण पारंपरिक मारु-गुर्जर वास्तुकला शैली के अनुसार किया गया है। मंदिर की नींव बेहद मजबूत बनाई गई है, जिसमें पत्थर, रेत, कंक्रीट और पकी हुई ईंटों की कई परतें शामिल हैं। बताया जाता है कि इसकी नींव में लगभग 5 मिलियन ईंटों का इस्तेमाल किया गया है।



