दिल्ली में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार, 3 नवंबर को राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 350 दर्ज किया गया। यह हवा की ‘बहुत खराब’ श्रेणी है। लगातार दूसरे दिन दिल्ली के लोगों को खराब हवा का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच गया, जहां हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई। सुबह इंडिया गेट और आसपास के इलाकों में धुंध के कारण दूर तक देखना भी मुश्किल हो गया।
पिछले 287 दिनों में दिल्ली की यह सबसे खराब हवा बताई जा रही है। इससे पहले 20 जनवरी को AQI 378 दर्ज हुआ था। प्रदूषण बढ़ने के बाद सोमवार को ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण यानी GRAP-2 लागू कर दिया गया।
जहांगीरपुरी में सबसे ज्यादा प्रदूषण, 11 इलाकों में AQI 400 पार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, दिल्ली के 57 निगरानी केंद्रों में से 35 पर हवा बहुत खराब और 12 पर खराब श्रेणी में रही। वहीं, 11 केंद्रों पर AQI गंभीर स्तर पर पहुंच गया।
सबसे ज्यादा प्रदूषण जहांगीरपुरी में दर्ज किया गया, जहां AQI 462 रहा। अन्य प्रभावित इलाके इस प्रकार हैं:
| इलाका | AQI |
|---|---|
| जहांगीरपुरी | 462 |
| पंजाबी बाग | 445 |
| रोहिणी | 442 |
| DTU | 438 |
| मुंडका | 429 |
| अलीपुर | 428 |
| विवेक विहार | 424 |
| नरेला | 420 |
| बवाना | 415 |
| IIT दिल्ली | 411 |
| दिल्ली यूनिवर्सिटी नॉर्थ कैंपस | 401 |
AQI की अलग-अलग श्रेणियों का क्या मतलब है?
AQI से पता चलता है कि हवा कितनी साफ या प्रदूषित है और इसका सेहत पर कितना असर पड़ सकता है।
0-50 अच्छी, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब और 401-500 गंभीर श्रेणी मानी जाती है।
वाहनों और पराली के धुएं से बढ़ रहा प्रदूषण
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे वाहनों का धुआं, पराली जलाना, उद्योग, निर्माण कार्य और मौसम जैसे कई कारण हैं। हवा धीमी चलने पर प्रदूषण के कण फैल नहीं पाते और वातावरण में जमा होने लगते हैं।
डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) के अनुसार, प्रदूषण में वाहनों का योगदान 15.8% और पराली का 15.3% रहा। आवासीय गतिविधियों का 3.9%, दिल्ली और आसपास के उद्योगों का 3%, निर्माण कार्यों का 2.2%, कचरा जलाने का 1.4%, बिजली उत्पादन का 1.2% और सड़क की धूल का 1.2% योगदान बताया गया।
पराली जलाने की 219 घटनाएं दर्ज
उपग्रह से मिली जानकारी के अनुसार, 2 नवंबर को छह राज्यों में खेतों में आग लगने की 219 घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें पंजाब में 98, राजस्थान में 67, मध्य प्रदेश में 48, उत्तर प्रदेश में 4 और हरियाणा में 2 घटनाएं शामिल थीं।
15 सितंबर से 2 नवंबर तक कुल 3,535 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें पंजाब में 1,612, राजस्थान में 738, मध्य प्रदेश में 614, उत्तर प्रदेश में 349, उत्तराखंड में 176, हरियाणा में 44 और दिल्ली में 2 घटनाएं शामिल हैं।
GRAP-2 लागू, प्रदूषण रोकने के लिए उठाए जाएंगे कदम
औसत AQI 324 होने के बाद सोमवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने GRAP-2 लागू किया। इस सीजन में पहली बार यह कदम उठाया गया है।
इसके तहत सड़कों की मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय और प्रदूषण वाले इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाएगी। साथ ही लोगों को मेट्रो और बसों जैसे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ट्रैफिक जाम और डीजल जनरेटर से होने वाले प्रदूषण को कम करने के प्रयास भी होंगे।
6 नवंबर तक राहत मिलने की उम्मीद कम
वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान के मुताबिक, 4 से 6 नवंबर तक दिल्ली की हवा बहुत खराब श्रेणी में रह सकती है। अगले छह दिनों तक भी प्रदूषण गंभीर स्तर तक पहुंचने की आशंका है।
मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को आसमान साफ रहने और अधिकतम तापमान 28 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मंगलवार को सफदरजंग में अधिकतम तापमान 29.1 डिग्री और न्यूनतम 16.4 डिग्री दर्ज किया गया।
प्रदूषण से बचने के लिए बरतें सावधानी
खराब हवा का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या दिल की बीमारी से परेशान लोगों पर पड़ सकता है। ऐसे में बाहर ज्यादा देर रहने और भारी कसरत करने से बचना चाहिए। धूल और धुएं वाली जगहों से दूर रहें। सांस लेने में परेशानी या लगातार खांसी होने पर डॉक्टर से सलाह लें। घर से निकलने से पहले अपने इलाके का ताजा AQI जरूर जांचें।

