साइबर अभियान ‘सीवाई-हॉक 4.0’ के तहत बड़ी कार्रवाई, फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 11 आरोपी गिरफ्तार करते थे ठगी

दिल्ली पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया। ये लोग सोशल मीडिया के जरिए लोगों को ठगते थे। मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य पीड़ितों की पहचान की जा रही है।

Fake Call Center Busted: दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ‘सीवाई-हॉक 4.0’ के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। दक्षिणी जिले के गोविंदपुरी इलाके में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया गया है। इस मामले में मास्टरमाइंड समेत कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

कौन-कौन हुए गिरफ्तार

पुलिस ने जिन आरोपियों को पकड़ा है, उनमें संदीप चौधरी, अश्विनी कुमार उर्फ तुषार, नीरज गुप्ता, अभय कुमार, अमन भगत, आर्यन नाथ, सिद्धार्थ चौहान, अंकित गुप्ता, ध्रुव, आकाश गुप्ता और पवन कुमार शामिल हैं। इसके अलावा, एक महिला पार्टनर रितु कुमारी और करीब 20 महिला कर्मचारियों की पहचान की गई है। इन्हें जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजा गया है।

शिकायत से खुला पूरा मामला

यह मामला राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज एक शिकायत से सामने आया। गुरुग्राम के एक व्यक्ति ने 13,200 रुपये की ठगी की शिकायत की थी। जांच में पता चला कि यह रकम एक ‘म्यूल’ बैंक खाते में भेजी गई थी, जिसका इस्तेमाल कई धोखाधड़ी मामलों में किया जा रहा था। इस खाते के मालिक पवन कुमार को पकड़कर पूछताछ की गई, तो उसने बताया कि उसने कमीशन के लालच में अपने बैंक की जानकारी अपने मालिक को दे दी थी।

स्पेशल टीम ने मारा छापा

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना साकेत की एक खास टीम बनाई गई। इंस्पेक्टर नगेंद्र नगर के नेतृत्व में टीम ने गोविंदपुरी स्थित दफ्तर पर छापा मारा। वहां एक पूरी तरह से सक्रिय अवैध कॉल सेंटर चल रहा था। छापेमारी के दौरान 31 कर्मचारी काम करते मिले, जिनमें 21 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल थे। पुलिस ने मौके से 35 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, एक कंप्यूटर, 15 सिम कार्ड और कई दस्तावेज बरामद किए।

सोशल मीडिया से चल रहा था खेल

जांच में सामने आया कि आरोपी Instagram और Facebook के जरिए वजन घटाने वाले प्रोडक्ट का प्रचार करते थे। जब कोई ग्राहक दिलचस्पी दिखाता, तो कॉल सेंटर से उसे फोन कर सामान खरीदने के लिए मनाया जाता था। शुरुआत में सही प्रोडक्ट भेजकर भरोसा जीता जाता, लेकिन बाद में ग्राहकों से ज्यादा पैसे लेकर या तो सामान नहीं भेजा जाता या खराब प्रोडक्ट दिया जाता।

ऐसे बनाते थे लोगों को शिकार

जब ग्राहक शिकायत करता, तो आरोपी बहाने बनाकर टालते रहते और बाद में संपर्क पूरी तरह बंद कर देते थे। इस तरह देशभर के कई लोगों को ठगा गया। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी पहले भी ऐसे मामलों में शामिल रह चुके हैं और इस गिरोह की शुरुआत मई 2023 में की गई थी।

आगे की जांच जारी

फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि देशभर में जुड़े अन्य पीड़ितों की पहचान और पैसों के लेन-देन की जांच की जा रही है।

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