Deve Gowda Kharge Political Banter:देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जो उन्होंने राज्यसभा में मजाकिया अंदाज में कहा था। खरगे ने हंसी-मजाक में कहा कि देवेगौड़ा ने “मोहब्बत” कांग्रेस से की, लेकिन “शादी” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कर ली। इस बयान के बाद पूरे सदन में ठहाके लगने लगे और माहौल हल्का-फुल्का हो गया।
देवेगौड़ा का जवाब
खरगे की इस टिप्पणी पर देवेगौड़ा ने भी उसी अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें भी उसी भाषा में बात करनी हो, तो वे कहेंगे कि उनकी “शादी” कांग्रेस से जबरन हुई थी। यही कारण था कि उन्हें बाद में “तलाक” लेना पड़ा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह रिश्ता उनके लिए सम्मानजनक नहीं रहा।
गठबंधन पर सफाई
देवेगौड़ा ने साफ किया कि उन्होंने कांग्रेस का साथ खुद नहीं छोड़ा, बल्कि कांग्रेस ही उनसे दूर हो गई। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां ऐसी बन गई थीं कि उनके पास अलग रास्ता चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उनका यह बयान राजनीतिक रिश्तों की जटिलता को भी दिखाता है।
संसद में गूंजे ठहाके
खरगे का बयान सुनते ही राज्यसभा में मौजूद सभी सांसद हंस पड़े। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी हंसी नहीं रोक सके। यह पल गंभीर राजनीति के बीच एक हल्का और मानवीय क्षण बन गया, जिसने सभी का ध्यान खींचा।
विदाई समारोह का अवसर
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम राज्यसभा के विदाई समारोह के दौरान हुआ। इस कार्यक्रम में रिटायर हो रहे सांसदों को सम्मान दिया जा रहा था। खरगे और प्रधानमंत्री मोदी दोनों ने ही सभी सांसदों के योगदान की सराहना की और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
राजनीति में नहीं होता रिटायरमेंट
खरगे ने अपने भाषण में कहा कि राजनीति में कोई भी व्यक्ति पूरी तरह रिटायर नहीं होता। उन्होंने कहा कि देश सेवा का जज्बा नेताओं को हमेशा सक्रिय रखता है। उनके मुताबिक, यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां काम कभी खत्म नहीं होता।
मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने संबोधन में कहा कि राजनीति में कभी “पूर्ण विराम” नहीं लगता। उन्होंने कहा कि संसद से विदा लेने के बाद भी नेता समाज और देश के लिए काम करते रहते हैं और उनका अनुभव हमेशा काम आता है।
बड़े नेताओं की मौजूदगी
इस विदाई समारोह में कुल 37 सांसद शामिल थे। इनमें देवेगौड़ा के अलावा रामदास अठावले, प्रियंका चतुर्वेदी, अभिषेक मनु सिंघवी और तिरुचि शिवा जैसे प्रमुख नेता भी मौजूद थे। सभी ने अपने-अपने अनुभव साझा किए और इस मौके को यादगार बनाया।

