Rajya Sabha Election 2026:सोमवार, 16 मार्च को तीन राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों पर वोटिंग हुई। इस दौरान कई जगह विधायकों ने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर वोट डाले, जिसे क्रॉस वोटिंग कहा जाता है। इसका सीधा फायदा बीजेपी को ओडिशा में मिला, जहां उसे एक अतिरिक्त सीट मिल गई। वहीं बिहार में विपक्ष के कुछ विधायक वोट देने ही नहीं पहुंचे। इस वजह से NDA को बड़ी राहत मिली और उसकी जीत आसान हो गई। अब राज्यसभा में NDA पहले से ज्यादा मजबूत नजर आ रहा है।
कितनी सीटों पर हुआ चुनाव
फरवरी और मार्च 2026 में देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटें खाली हुई थीं। इन सीटों के लिए कुल 40 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से 26 उम्मीदवार बिना किसी मुकाबले के ही जीत गए। जबकि हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 सीटों पर मतदान हुआ। असली मुकाबला यहीं देखने को मिला और यहीं पर खेल पलटा।
किसके पास कितनी ताकत
राज्यसभा में कुल 245 सीटें होती हैं, लेकिन अभी 243 सीटें भरी हुई हैं और 2 खाली हैं। बहुमत के लिए 122 सीटें चाहिए होती हैं। NDA के पास 139 सीटें हैं, जो बहुमत से 17 ज्यादा हैं। दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन INDIA के पास 76 सीटें हैं, जबकि अन्य दलों के पास 28 सीटें हैं। इससे साफ है कि NDA की स्थिति काफी मजबूत है।
कैसे होती है वोटिंग
राज्यसभा चुनाव में EVM मशीन का इस्तेमाल नहीं होता। यहां विधायक बैलेट पेपर पर वोट देते हैं। वे उम्मीदवारों को अपनी पसंद के हिसाब से 1, 2, 3 नंबर देकर प्राथमिकता तय करते हैं। इसे प्राथमिकता वोटिंग कहा जाता है। जीत के लिए कितने वोट चाहिए, यह एक फॉर्मूले से निकाला जाता है।
हरियाणा का आसान उदाहरण
मान लीजिए हरियाणा में 2 सीटें खाली हैं और कुल 90 विधायक हैं। तो जीत का आंकड़ा निकालने के लिए (90 ÷ (2+1)) +1 किया जाता है। यानी 90 को 3 से भाग दिया, जो 30 आया। फिर उसमें 1 जोड़ दिया, तो 31 हो गया। मतलब एक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 31 वोट चाहिए।
बिहार में कैसे बदला खेल
बिहार में 5 सीटों पर चुनाव हुआ। यहां कुल 243 विधायक हैं, लेकिन वोटिंग के दिन सिर्फ 239 विधायक ही पहुंचे। इस वजह से जीत के लिए जरूरी वोट घटकर 40 हो गए। NDA के पास 202 विधायक थे, जो 5 सीट जीतने के लिए काफी थे।
विपक्ष को क्यों नुकसान हुआ
विपक्ष के कई विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हुए। RJD के 4 विधायक गायब रहे और कांग्रेस के 3 विधायक भी नहीं पहुंचे। इससे विपक्ष कमजोर पड़ गया। वहीं NDA के सभी विधायक मौजूद रहे और उन्होंने वोट डाला, जिससे उसे पूरा फायदा मिला।
आखिरी सीट का दिलचस्प मुकाबला
बिहार की पांचवीं सीट पर मुकाबला काफी रोमांचक रहा। बीजेपी के उम्मीदवार को पहली पसंद के 30 वोट मिले, जबकि RJD उम्मीदवार को 37 वोट मिले। लेकिन दूसरी पसंद के वोटों में बीजेपी उम्मीदवार आगे निकल गया और आखिर में जीत उसी की हुई।
संख्या नहीं, सही रणनीति बहुत जरूरी
इस चुनाव से साफ है कि सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि सही रणनीति भी बहुत जरूरी होती है। NDA ने दोनों चीजों का सही इस्तेमाल किया, जबकि विपक्ष की कमजोर तैयारी और गैरहाजिरी उस पर भारी पड़ी।








