कर्तव्य पथ पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की गर्जना, हाइपरसोनिक ताकत और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज से दुनिया दंग

भारत ने अपना 77वां गणतंत्र दिवस 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ की थीम पर मनाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में 'ऑपरेशन सिंदूर' की जीत और हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक जैसी सैन्य उपलब्धियों ने कर्तव्य पथ पर भारत की अटूट शक्ति का प्रदर्शन किया।

Republic Day 2026

Republic Day 2026: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ वीरता, संस्कृति और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम का गवाह बना। इस वर्ष का समारोह विशेष रूप से ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने की थीम पर आधारित रहा, जिसकी अगुवाई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की। समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन शामिल हुए। परेड का मुख्य आकर्षण ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय सेना की ऐतिहासिक सफलता और स्वदेशी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन रहा। कर्तव्य पथ पर पहली बार ‘चरणबद्ध युद्ध संरचना’ का प्रदर्शन किया गया, जिसमें ड्रोन, टैंक और तोपखाने के समन्वित युद्ध कौशल ने दुनिया को भारत की बढ़ती रक्षा सामर्थ्य और आत्मनिर्भरता का कड़ा संदेश दिया।

सैन्य शक्ति और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का गौरव

Republic Day 2026 परेड की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। सैन्य प्रदर्शन में इस बार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की गूंज साफ सुनाई दी। डीआरडीओ द्वारा विकसित लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) ने सभी का ध्यान खींचा। यह एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 1500 किलोमीटर तक है। इसके प्रदर्शन के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा हो गया है जिनके पास हाइपरसोनिक तकनीक मौजूद है।

आकाश वेपन सिस्टम और ABHRA मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम ने आसमान में भारत की अभेद्य सुरक्षा का परिचय दिया। पहली बार पेश की गई ‘चरणबद्ध युद्ध संरचना’ (Phased Battle Array) ने युद्ध के वास्तविक दृश्यों को कर्तव्य पथ पर जीवंत कर दिया, जिसमें अत्याधुनिक ड्रोन्स और टैंकों का तालमेल दिखाया गया।

सांस्कृतिक विविधता और अनूठे दस्ते

रक्षा शक्ति के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत भी झांकियों के माध्यम से प्रदर्शित की गई। मणिपुर, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की झांकियों ने देश की विविधता को दर्शाया। सीमा सुरक्षा बल (BSF) का ऊंट दस्ता और ‘कैमल माउंटेड बैंड’ अपनी पारंपरिक शाही पोशाक में परेड की शोभा बढ़ाते नजर आए।

इस बार पशु सेना (Animal Contingent) में भी नयापन दिखा। ‘हिम योद्धा’ दस्ते के साथ बैक्ट्रियन ऊंट, ज़ांस्करी पोनी और शिकारी पक्षी ‘ब्लैक काइट्स’ शामिल थे। स्वदेशी नस्ल के कुत्तों—मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड और राजापालयम—के दस्ते ने सुरक्षा बलों में उनके बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।

77वां Republic Day 2026 केवल एक औपचारिक परेड नहीं, बल्कि बदलते भारत की एक तस्वीर थी। ‘वंदे मातरम’ की गूंज और स्वदेशी तकनीक के प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब रक्षा के क्षेत्र में न केवल आत्मनिर्भर हो रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक बड़ी शक्ति बनकर उभर रहा है।

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