NCRTC New Corridors: दिल्ली-एनसीआर में यातायात की सूरत बदलने के लिए सरकार ने दो नए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर की योजना को गति दे दी है। दिल्ली-पानीपत-करनाल और दिल्ली-गुड़गांव-बावल कॉरिडोर के निर्माण के बाद हरियाणा के औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्रों की दूरी मिनटों में सिमट जाएगी। सराय काले खां से करनाल तक का 136 किलोमीटर का सफर अब महज 90 मिनट में पूरा होगा, जबकि दिल्ली से बावल पहुंचने में सिर्फ एक घंटा लगेगा। इन प्रोजेक्ट्स का मुख्य उद्देश्य सड़कों से लगभग दो लाख निजी वाहनों को हटाकर ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान निकालना है। यह ‘नमो भारत’ ट्रेनें न केवल समय बचाएंगी, बल्कि हाई-स्पीड ग्रीन ट्रांजिट के जरिए क्षेत्रीय आर्थिक विकास और उत्पादकता को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

सड़कों से हटेंगे 2 लाख वाहन, प्रदूषण में आएगी भारी कमी
NCRTC RRTS के इन दो नए कॉरिडोर के निर्माण का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव पर्यावरण और सड़क यातायात पर पड़ेगा। विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के अनुसार, इन रूटों के चालू होने से सड़कों पर चलने वाली करीब 2 लाख गाड़ियां कम होने का अनुमान है। इससे सालाना 2,50,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा, जो दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नमो भारत ट्रेनें स्टील-टू-स्टील रोलिंग तकनीक पर चलती हैं, जिससे घर्षण कम होता है और यह सड़क वाहनों के मुकाबले केवल 1/5वां जीवाश्म ईंधन खर्च करती हैं।

दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर: मुख्य आकर्षण
136 किलोमीटर लंबे इस NCRTC कॉरिडोर का 100 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा में और 36 किलोमीटर दिल्ली में होगा।
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स्टेशन: सराय काले खां से करनाल न्यू ISBT के बीच कुल 17 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
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प्रमुख पड़ाव: यह रूट सोनीपत एजुकेशन सिटी, कुंडली, बरही औद्योगिक क्षेत्र, पानीपत शहर और IOCL रिफाइनरी जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों को जोड़ेगा।
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समय की बचत: कश्मीरी गेट से मुरथल की दूरी केवल 30 मिनट में तय की जा सकेगी।
दिल्ली-गुड़गांव-बावल कॉरिडोर: औद्योगिक विकास को गति
92 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर गुड़गांव, मानेसर और MBIR होते हुए बावल तक जाएगा।
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एयरपोर्ट कनेक्टिविटी: यह कॉरिडोर दिल्ली एयरपोर्ट को सीधे RRTS नेटवर्क से जोड़ेगा, जिससे हवाई यात्रियों के लिए एनसीआर के अन्य हिस्सों तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
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रफ़्तार: 90 किमी/घंटा की औसत परिचालन गति के साथ, दिल्ली से बावल का सफर 60 मिनट में सिमट जाएगा।
मल्टी-मोडल इंटीग्रेशन और भविष्य की राह
नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) इन स्टेशनों को मेट्रो और रेलवे स्टेशनों के साथ जोड़ने पर जोर दे रहा है ताकि यात्रियों को ‘सीमलैस’ कनेक्टिविटी मिल सके। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर की सफलता (जहां 55 किमी का हिस्सा पहले से चालू है) को देखते हुए, सरकार इन नए रूटों को भी प्राथमिकता दे रही है। यह परियोजना दिल्ली में भीड़ कम करने के लिए गठित हाई-पावर्ड कमेटी की सिफारिशों का हिस्सा है, जो भविष्य के आधुनिक भारत की एक नई तस्वीर पेश करेगी।









