Sharjeel Imam Bail Case: 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े ‘लार्जर कॉन्स्पिरेसी’ यानी बड़ी साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने साफ कहा है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों और दस्तावेजों के आधार पर शरजील इमाम के खिलाफ UAPA के तहत प्रथम दृष्टया आरोप बनते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्तर पर मामले के तथ्यों की गहराई में जाना जरूरी नहीं है।
यह फैसला शरजील इमाम के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अगले एक साल तक दोबारा जमानत याचिका दायर करने से भी रोक दिया है। शरजील पिछले करीब पांच साल से तिहाड़ जेल में बंद हैं।
शरजील इमाम कौन है
शरजील इमाम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, यानी JNU के पूर्व शोध छात्र रहे हैं। वर्ष 2019 के अंत में जब देशभर में नागरिकता संशोधन कानून और NRC के खिलाफ प्रदर्शन हुए, तब शरजील इन आंदोलनों के दौरान दिए गए अपने भाषणों की वजह से चर्चा में आए। शुरुआत में वे एक छात्र कार्यकर्ता के रूप में जाने गए, लेकिन बाद में उन पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे।
पहली गिरफ्तारी और गंभीर आरोप
शरजील इमाम को पहली बार 28 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप है कि दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 के दौरान उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया में ऐसे भाषण दिए, जिससे समाज में तनाव बढ़ा। उनके खिलाफ देशद्रोह, सांप्रदायिक नफरत फैलाने और UAPA जैसी गंभीर धाराएं लगाई गईं। भाषण वायरल होने के बाद दिल्ली समेत असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भी उनके खिलाफ केस दर्ज हुए।
दिल्ली दंगों की साजिश में भूमिका का आरोप
अगस्त 2020 में दिल्ली पुलिस ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा को एक सोची-समझी साजिश बताया। पुलिस का दावा है कि शरजील इमाम ने अपने भाषणों और प्रदर्शनों के जरिए माहौल को हिंसा की ओर मोड़ा। इसी आधार पर उनके खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश और दंगा भड़काने जैसी धाराएं लगाई गईं।
अदालत में क्या बोले शरजील
जमानत के लिए शरजील के वकीलों ने दलील दी कि उन्हें सिर्फ आरोपों के आधार पर खतरनाक बताया जा रहा है। उनका कहना था कि शरजील न तो आतंकवादी हैं और न ही किसी हिंसक गतिविधि में सीधे शामिल रहे हैं। यह भी तर्क दिया गया कि उनकी गिरफ्तारी दंगों से पहले हुई थी।
कोर्ट का रुख और आगे की राह
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि UAPA की धारा 43D(5) के तहत इस तरह के मामलों में जमानत के नियम बेहद सख्त हैं। कोर्ट ने माना कि फिलहाल उपलब्ध सामग्री के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट भी शरजील को राहत देने से इनकार कर चुका है।








