Turkman Gate Faiz-e-Ilahi Masjid: दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास अवैध अतिक्रमण को लेकर चला प्रशासन का बुलडोजर चर्चा का विषय बना हुआ है। यह विवाद केवल एक स्थानीय अतिक्रमण का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी जमीन, वक्फ दावों और न्यायिक आदेशों के बीच उलझा एक पेचीदा कानूनी संघर्ष है। मामले की जड़ें ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ की उस शिकायत में हैं, जिसमें दावा किया गया था कि रामलीला ग्राउंड की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर वहां बारात घर, पार्किंग और निजी क्लीनिक चलाए जा रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और लंबी कानूनी सुनवाई के बाद, प्रशासन ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत सीमा से बाहर किया गया हर निर्माण अवैध है, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
जांच में क्या हुआ खुलासा?
शिकायत मिलने के बाद L&DO (भूमि एवं विकास कार्यालय), DDA और MCD ने एक संयुक्त सर्वे किया। इस सर्वे की रिपोर्ट चौंकाने वाली थी:
लगभग 2,512 वर्ग फुट क्षेत्र पर सीधा अतिक्रमण पाया गया।
रामलीला ग्राउंड की कुल 36,428 वर्ग फुट सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा मिला।
जमीन का उपयोग धार्मिक कार्यों के बजाय व्यावसायिक उद्देश्यों जैसे शादी घर और डायग्नोस्टिक सेंटर के लिए हो रहा था।
मालिकाना हक की कानूनी जंग
अदालत और सुनवाई के दौरान Turkman Gate जमीन के मालिकाना हक को लेकर दो मुख्य पक्ष सामने आए:
मस्जिद प्रबंधन व वक्फ बोर्ड: इनका दावा था कि मस्जिद 100 साल से पुरानी है और 1970 के गजट नोटिफिकेशन में इसका जिक्र है। उन्होंने जमीन को कब्रिस्तान की संपत्ति बताया।
सरकारी पक्ष (L&DO/DDA): सरकार ने 1952 से 1972 तक के रिकॉर्ड पेश किए। सबसे अहम सबूत 15 फरवरी 1940 की लीज डीड रही, जिसके अनुसार मस्जिद के पास केवल 0.195 एकड़ जमीन का ही वैध अधिकार है।
हाईकोर्ट का रुख और MCD का अंतिम फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी पक्षों को सुनने के बाद अवैध Turkman Gate अतिक्रमण हटाया जाए। सुनवाई के बाद MCD ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि 0.195 एकड़ (लगभग 8500 वर्ग फुट) से बाहर की जमीन पर वक्फ या मस्जिद प्रबंधन का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
स्पष्टीकरण: प्रशासन ने यह साफ किया कि पूरी मस्जिद अवैध नहीं है। केवल वह हिस्सा जो 0.195 एकड़ की निर्धारित लीज सीमा से बाहर बना था, उसे ही ‘अतिक्रमण’ मानकर हटाया गया है।
क्या था बुलडोजर एक्शन का आधार?
सरकार का तर्क है कि सरकारी जमीन पर मस्जिद या दरगाह के नाम पर व्यावसायिक गतिविधियां (जैसे बारात घर या पार्किंग से कमाई) नहीं की जा सकतीं। चूंकि Turkman Gate मस्जिद प्रबंधन अतिरिक्त जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज पेश करने में विफल रहा, इसलिए कानूनन उस जमीन को भारत सरकार की संपत्ति घोषित कर खाली कराया गया।



