UGC के नए नियम पर महासंग्राम: नेहा राठौड़ बोलीं- ‘अब मजा नहीं आ रहा क्या?’, भड़के कुमार विश्वास!

यूजीसी द्वारा 15 जनवरी 2026 से लागू नए जातिगत भेदभाव विरोधी नियमों ने देश में वैचारिक जंग छेड़ दी है। जहाँ लोकगायिका नेहा सिंह राठौड़ इसे सामाजिक सुधार बता रही हैं, वहीं कवि कुमार विश्वास ने इसे 'सवर्णों' के विरुद्ध बताते हुए वापस लेने की मांग की है।

UGC New Rules 2026

UGC New Rules 2026: देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर विवाद गहरा गया है। 15 जनवरी 2026 से प्रभावी हुए इन नियमों के तहत अब एससी-एसटी के साथ-साथ ओबीसी छात्रों और कर्मचारियों के लिए भी ‘समान अवसर प्रकोष्ठ’ बनाना अनिवार्य होगा। इस कानून ने समाज को दो धड़ों में बांट दिया है। मशहूर कवि कुमार विश्वास ने इसे ‘सवर्णों’ के साथ अन्याय बताते हुए मार्मिक कविता के जरिए सरकार से इसे वापस लेने की अपील की है। वहीं, प्रसिद्ध लोकगायिका नेहा सिंह राठौड़ ने इस कानून का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे समाज की ‘पुरानी बीमारी’ का कड़वा लेकिन जरूरी इलाज करार दिया है। विरोध और समर्थन के बीच शैक्षणिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

कुमार विश्वास का कड़ा विरोध: “मैं अभागा सवर्ण हूं”

मशहूर कवि कुमार विश्वास ने इन नए नियमों को लेकर सोशल मीडिया पर अपना विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने रमेश रंजन की एक कविता साझा करते हुए सवर्ण समाज के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। विश्वास ने लिखा:

‘चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा।’

कुमार विश्वास का मानना है कि ये नियम एक विशेष वर्ग को लक्षित कर रहे हैं और उन्होंने सरकार से तत्काल इन नियमों को वापस लेने की मांग की है। उनके इस रुख को सवर्ण समाज के उन प्रदर्शनों से जोड़कर देखा जा रहा है जो उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हो रहे हैं।

नेहा सिंह राठौड़ का तीखा पलटवार: “देशहित सर्वोपरि”

दूसरी ओर, लोकगायिका नेहा सिंह राठौड़ ने ढाई मिनट का एक वीडियो जारी कर विरोध करने वालों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग भेदभाव करते आए हैं, वही इस कानून से डरे हुए हैं। नेहा ने तर्क दिया:

  • चोर और अत्‍याचारी का डर: उन्होंने कहा कि चोरी के खिलाफ कानून से वही तिलमिलाएगा जो चोर होगा।

  • कड़वी दवा: नेहा ने आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट की तरह इस नए नियम को भी एक आवश्यक ‘कड़वी दवा’ बताया जो समाज के भेदभाव को खत्म करने के लिए जरूरी है।

  • विशेषाधिकार पर चोट: उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कुछ लोग इसलिए नाराज हैं क्योंकि अब वे दूसरों को अपमानित नहीं कर पाएंगे या उनका ‘अवैध विशेषाधिकार’ छिनने वाला है?

क्या है नया यूजीसी कानून?

UGC के नए रेगुलेशन के अनुसार, अब उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी (OBC) छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भी जातिगत उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करने का कानूनी अधिकार मिला है। पहले यह व्यवस्था मुख्य रूप से एससी-एसटी समुदाय तक सीमित थी। अब प्रत्येक संस्थान में:

  1. समान अवसर प्रकोष्ठ (Equal Opportunity Cell) स्थापित करना अनिवार्य है।

  2. जातिगत भेदभाव की शिकायतों के लिए एक सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति होगी।

इस्तीफे और प्रदर्शन का दौर

इस UGC कानून का विरोध केवल बयानों तक सीमित नहीं है। बरेली में तैनात पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री ने सवर्णों के साथ अन्याय का हवाला देते हुए अपने पद (सिटी मजिस्ट्रेट) से इस्तीफा दे दिया है। सवर्ण समाज के विभिन्न संगठन भी सड़कों पर उतरकर इस ‘विभेदकारी’ नियम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा: यूजीसी कानून 2026 और बंधक बनाए जाने के आरोपों से मचा हड़कंप

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