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Diesel Export Duty: डीजल और ATF निर्यात पर सरकार सख्त, बढ़ाया एक्साइज शुल्क,जानिए क्या होगा असर

Diesel Export Duty:  पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 16 जून से लागू हो गई हैं। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर देश की ऊर्जा जरूरतों पर न पड़े।

डीजल और ATF पर बढ़ा निर्यात शुल्क

सरकार की नई अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 13.05 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर SAED 9.05 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.05 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

हालांकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह पहले की तरह 1.05 रुपये प्रति लीटर ही रहेगा।

आम लोगों पर नहीं पड़ेगा सीधा असर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि फिलहाल आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में किसी तत्काल बदलाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क पहली बार मार्च 2022 में लागू किया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि तेल कंपनियां केवल अधिक मुनाफे के लिए बड़े पैमाने पर निर्यात न करें और घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे।

वर्तमान में पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। इससे रिफाइनरी कंपनियों को घरेलू मांग को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

हर 15 दिन में होती है समीक्षा

स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी की समीक्षा हर पखवाड़े की जाती है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, निर्यात लाभ और घरेलू मांग-आपूर्ति की स्थिति का आकलन किया जाता है। उसी आधार पर शुल्क दरों में बदलाव किया जाता है।

ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क बढ़ने से तेल कंपनियों के निर्यात मार्जिन पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन इससे देश में डीजल और जेट फ्यूल की उपलब्धता बेहतर बनी रहेगी। सरकार फिलहाल ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

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