भारत में प्राकृतिक गैस की सप्लाई को लेकर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और LNG आपूर्ति में व्यवधान के बीच भारतीय ऊर्जा कंपनियों को स्पॉट मार्केट से गैस खरीदने के लिए कई वर्षों में सबसे ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। GAIL India ने सितंबर में डिलीवरी वाली LNG की एक खेप के लिए 23 डॉलर प्रति MMBtu से ज्यादा का भुगतान किया है। वहीं गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (GSPC) ने भी सितंबर डिलीवरी के लिए करीब 23 डॉलर प्रति MMBtu की कीमत पर LNG खरीदी है। ये सौदे 2022 के बाद भारत में LNG की सबसे महंगी खरीद में शामिल बताए जा रहे हैं।
स्पॉट मार्केट पर दबाव
भारतीय सरकारी गैस और ऊर्जा कंपनियां इस समय जरूरत पूरी करने के लिए LNG के स्पॉट मार्केट का सहारा ले रही हैं। इसकी बड़ी वजह देश में फर्टिलाइजर उत्पादन के लिए गैस की उपलब्धता बनाए रखना भी है। सरकार फर्टिलाइजर सेक्टर को समर्थन देने पर जोर दे रही है, जबकि इस उद्योग में प्राकृतिक गैस की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में कंपनियों को कीमत बढ़ने के बावजूद LNG खरीदनी पड़ रही है। इससे ऊर्जा कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
कतर से सप्लाई प्रभावित
भारत आमतौर पर LNG की बड़ी मात्रा कतर के साथ लंबे समय के अनुबंधों के जरिए हासिल करता है। लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण इस सप्लाई चैन पर असर पड़ा है। मार्च में ईरानी हमलों के दौरान कतर के LNG उत्पादन संयंत्रों को नुकसान पहुंचा था। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत के प्रमुख LNG आयातक Petronet LNG ने भी अगस्त में कहा था कि सितंबर के लिए कतर से LNG सप्लाई को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है।
यूरोप से मुकाबला
भारत की परेशानी इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि LNG खरीदने के लिए उसे यूरोपीय खरीदारों से मुकाबला करना पड़ रहा है। यूरोप में गैस की कीमतें पांच महीने के उच्च स्तर तक पहुंच चुकी हैं। ऐसे माहौल में यूरोपीय कंपनियां भी LNG की खरीद बढ़ा रही हैं, जिससे उपलब्ध कार्गो पर प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है। एशियाई बाजार में भी सितंबर डिलीवरी की LNG कीमतें हाल के महीनों में काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
BPCL ने भी खरीदी
महंगी LNG खरीदने वाली भारतीय कंपनियों की सूची में BPCL का नाम भी जुड़ गया है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इस सप्ताह स्पॉट मार्केट से LNG की एक खेप खरीदने का समझौता किया है। हालांकि, इस सौदे के लिए BPCL ने कितनी कीमत चुकाई, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। लगातार महंगी होती गैस भारत की ऊर्जा कंपनियों के साथ-साथ फर्टिलाइजर और अन्य गैस-आधारित उद्योगों के लिए भी चुनौती बढ़ा सकती है।
