CBSE का बड़ा धमाका: अब बिना लैब वाले स्कूलों में भी छात्र सीखेंगे कोडिंग और AI, जानें कैसे!

सीबीएसई ने कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए 'हब एंड स्पोक' मॉडल पर एक महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। इसके तहत समृद्ध संसाधनों वाले 'हब' स्कूल अन्य स्कूलों के साथ अपनी लैब और सुविधाएं साझा करेंगे, जिसके लिए जल्द ओरिएंटेशन प्रोग्राम होगा।

CBSE

CBSE Orientation Program: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों में कौशल शिक्षा (Skill Education) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के तहत एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इस पहल का उद्देश्य नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप छात्रों को व्यावसायिक विषयों में निपुण बनाना और संसाधनों की कमी को दूर करना है। इस मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बोर्ड जल्द ही एक विशेष ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित करने जा रहा है, जिसमें स्कूलों को साझेदारी की बारीकियां समझाई जाएंगी।

यह मॉडल उन स्कूलों के लिए वरदान साबित होगा जिनके पास अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की कमी है। इसके माध्यम से सीबीएसई का लक्ष्य ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्रों तक वैश्विक स्तर की कौशल शिक्षा पहुँचाना और स्कूलों के बीच आपसी सहयोग का एक मजबूत तंत्र विकसित करना है।

क्या है ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल?

यह मॉडल एक सहयोगी व्यवस्था पर आधारित है:

  • हब (Hub) स्कूल: वे स्कूल जो बुनियादी ढांचे, आधुनिक प्रयोगशालाओं और उपकरणों के मामले में पूरी तरह समृद्ध हैं।

  • स्पोक (Spoke) स्कूल: वे स्कूल जिनके पास संसाधनों या विशेषज्ञता की कमी है।

इस व्यवस्था में ‘हब’ स्कूल अपने संसाधनों को ‘स्पोक’ स्कूलों के साथ साझा करेंगे, जिससे स्पोक स्कूलों के छात्रों को भी महंगी मशीनों और लैब तक पहुंच मिल सकेगी।

मुख्य हाइलाइट्स और लाभ

CBSE द्वारा जारी इस नोटिस में निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया है:

विशेषता

विवरण

संसाधनों का साझाकरण

छोटे स्कूल के छात्र बड़े स्कूलों की लैब, कोडिंग सेंटर और एआई टूल्स का उपयोग कर सकेंगे।

लागत में कमी

प्रत्येक स्कूल को अलग से महंगी लैब बनाने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे वित्तीय बोझ कम होगा।

NEP 2020 का पालन

कोडिंग, डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी।

ओरिएंटेशन प्रोग्राम

बोर्ड ऑनलाइन माध्यम से स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगा।

रजिस्ट्रेशन और भागीदारी

CBSE ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि जो स्कूल इस मॉडल का हिस्सा बनना चाहते हैं या पहले से नामांकित हैं, वे आधिकारिक लिंक के माध्यम से पंजीकरण सुनिश्चित करें। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में स्कूलों को केवल शैक्षणिक केंद्र ही नहीं, बल्कि ‘कौशल विकास केंद्र’ के रूप में पहचान बनानी होगी।

स्कूलों को सलाह दी गई है कि वे कार्यक्रम की विस्तृत समय सारिणी के लिए नियमित रूप से cbse.gov.in देखते रहें।

कांटे बदलेंगे किस्मत! यूपी में फ्री मिलेगी नागफनी की खेती, विभाग खुद खरीदेगा पत्तियां।

Exit mobile version