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UP संस्कृत बोर्ड का बड़ा फैसला,अब हिंदी के पेपर में नहीं आएंगे संस्कृत के सवाल

यूपी संस्कृत शिक्षा परिषद ने नए सत्र से कौशल विकास के लिए साप्ताहिक विशेष कार्यक्रम अनिवार्य कर दिए हैं। अब छात्रों को कुटीर उद्योग, डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा की शिक्षा मिलेगी। हिंदी पाठ्यक्रम से संस्कृत अंश हटा दिया गया है और बोर्ड परीक्षा का परिणाम अप्रैल अंत तक जारी होगा।

Sadaf Farooqui by Sadaf Farooqui
April 2, 2026
in शिक्षा
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Introduction of skill development: उत्तर प्रदेश संस्कृत शिक्षा परिषद ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए क्रांतिकारी बदलावों की घोषणा की है। प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों में अब केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि छात्रों के समग्र और व्यावहारिक विकास पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। परिषद ने अपने नए शैक्षणिक पंचांग (Academic Calendar) में यह अनिवार्य कर दिया है कि हर सप्ताह एक दिन विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन सत्रों का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों द्वारा छात्रों की व्यक्तिगत क्षमताओं की पहचान करना और उन्हें आधुनिक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

रोजगार और कुटीर उद्योगों का व्यावहारिक प्रशिक्षण

संस्कृत के छात्रों को भविष्य में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब विद्यालयों में विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। ये विशेषज्ञ छात्रों को रोजगार के विभिन्न अवसरों और करियर मार्गदर्शन की जानकारी देंगे। इसके साथ ही, पाठ्यक्रम में कुटीर उद्योगों के व्यावहारिक प्रदर्शन को भी शामिल किया गया है। इससे छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ कामकाजी कौशल (Vocational Skills) सीखने का मौका मिलेगा, जिससे वे पढ़ाई पूरी करने के बाद स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा सकेंगे।

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पाठ्यक्रम में बदलाव: हिंदी के पेपर से हटा संस्कृत अंश

इस सत्र से पाठ्यक्रम के स्वरूप में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। अब हिंदी के पाठ्यक्रम से संस्कृत अंश को पूरी तरह हटा दिया गया है, जिसका अर्थ है कि हिंदी के प्रश्नपत्र में अब संस्कृत से जुड़े सवाल नहीं पूछे जाएंगे। कक्षा 6 और 7 के छात्रों के लिए एनसीईआरटी की ‘बाल महाभारत कथा’ और ‘महान विभूतियों’ के प्रेरक पाठों को शामिल किया गया है। वहीं, कक्षा 9 से 12 तक के स्तर पर नए साहित्यिक पाठ जोड़े गए हैं, जो छात्रों की भाषाई समझ को और गहरा करेंगे।

डिजिटल साक्षरता और बोर्ड परीक्षा परिणाम की तैयारी

आधुनिक युग की जरूरतों को देखते हुए संस्कृत विद्यालयों के छात्रों को अब डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) और साइबर क्राइम (Cyber Crime) के प्रति जागरूक किया जाएगा। परिषद के सचिव शिवलाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में परिषद के 1500 से अधिक विद्यालय हैं, जिनमें एक लाख से ज्यादा छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि संस्कृत बोर्ड का मूल्यांकन कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है और बोर्ड परीक्षा के परिणाम अप्रैल के आखिरी सप्ताह में घोषित किए जाने की पूरी संभावना है।

Tags: educational newsSanskrit Board
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Sadaf Farooqui

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