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धुरंधर फिल्म पर भड़के ध्रुव राठी, कहा- फिल्म झूठी, भ्रामक और जनता को प्रभावित करने वाला प्रोपेगेंडा फैला रही है

लोकप्रिय यूट्यूबर और पॉलिटिकल कमेंटेटर ध्रुव राठी ने हाल ही में बॉलीवुड की नई रिलीज़ फिल्म धुरंधर पर तीखी प्रतिक्रिया दी। अपने वीडियो में राठी ने फिल्म को “खतरनाक प्रोपेगेंडा” बताया और कहा कि यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं बल्कि जनता को भ्रामक संदेश दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म का कथानक झूठ और वास्तविक घटनाओं के मिश्रण पर आधारित है, जिससे दर्शक इसे वास्तविक घटनाओं के रूप में मान सकते हैं।

राठी ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि धुरंधर की उच्च गुणवत्ता वाली प्रोडक्शन इसे और अधिक प्रभावशाली बनाती है। उनके अनुसार, अच्छी तरह बनाई गई फिल्में दर्शकों पर गहरा प्रभाव डालती हैं और इस तरह के प्रोपेगेंडा का असर कमजोर फिल्मों की तुलना में कहीं अधिक होता है।

वास्तविक घटनाओं और कथानक पर चिंता

ध्रुव राठी ने कहा कि फिल्म ने 26/11 के आतंकवादी हमलों के वास्तविक फुटेज और रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल किया है। उनके अनुसार, यह दर्शकों के लिए फिल्म और वास्तविक घटनाओं के बीच की सीमा को मिटा देता है, और लोग इसे वास्तविकता के रूप में स्वीकार कर सकते हैं।

उन्होंने फिल्म में खुफिया एजेंसियों और अपराधी तत्वों के चित्रण की भी आलोचना की। राठी का मानना है कि इस तरह के चित्रण से जनता की सोच पर गलत असर पड़ सकता है, खासकर जब फिल्म इसे वास्तविक घटनाओं पर आधारित बताती है।

ऑनलाइन प्रतिक्रिया और बहस

राठी के वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर उग्र प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोग उनके विचारों से असहमत हैं और कुछ ने कहा कि इस विवाद ने फिल्म की लोकप्रियता और बढ़ा दी है। वहीं, उनके समर्थकों ने माना कि सिनेमा में वास्तविक घटनाओं के प्रस्तुतीकरण पर सवाल उठाना महत्वपूर्ण है।

यह विवाद अब केवल फिल्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सृजनात्मक स्वतंत्रता, मीडिया प्रभाव और समाज में फिल्मों की जिम्मेदारी पर बहस का रूप ले चुका है।

फिल्म की सफलता और इंडस्ट्री का रुख

हालांकि राठी की आलोचना ने ध्यान खींचा है, धुरंधर बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर रही है। फिल्म ने कई करोड़ की कमाई कर ली है और इसे साल की सफल फिल्मों में शामिल किया गया है। निर्देशक आदित्य धर और प्रमुख कलाकार रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना और आर. माधवन ने अभी तक राठी के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

फिल्म इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद भारतीय सिनेमा में यथार्थ घटनाओं के प्रस्तुतीकरण और उसके प्रभाव पर बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

 

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