Cheque Bounce Case: हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता राजपाल यादव की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चेक बाउंस मामले में सरेंडर करने के आदेश से राहत पाने के लिए उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने उन्हें कोई राहत देने से साफ मना कर दिया है। कोर्ट ने पहले से जारी आदेश को बरकरार रखते हुए उन्हें तय तारीख पर सरेंडर करने का निर्देश दिया।
जज ने कही सख्त बात
सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राजपाल यादव की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि पहले अभिनेता की ओर से बताया गया था कि वह मुंबई में हैं, इसलिए उन्हें सरेंडर के लिए दो दिन का समय दिया गया था। अब उनके पास राहत देने के लिए कोई ठोस कारण नहीं बचता। कोर्ट ने साफ कहा कि इस मामले में नरमी दिखाने का कोई आधार नहीं बनता।
मोहलत की मांग भी ठुकराई
अदालत में राजपाल यादव के वकील ने दलील दी कि अगर एक हफ्ते का समय मिल जाए तो शिकायतकर्ता को पूरा पैसा चुका दिया जाएगा। वकील ने यह भी कहा कि 50 लाख रुपये का इंतजाम कर लिया गया है और अगले दिन भुगतान किया जा सकता है। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और किसी भी तरह की मोहलत देने से इनकार कर दिया।
पहले भी मिला था आदेश
इससे पहले भी हाई कोर्ट ने अभिनेता को 4 फरवरी तक संबंधित जेल अधीक्षक के सामने सरेंडर करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने अभिनेता के व्यवहार को निंदनीय बताते हुए कहा कि बार-बार आश्वासन देने के बाद भी भुगतान नहीं करना न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है।
किस कंपनी से जुड़ा है मामला
यह मामला दिल्ली की कंपनी मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। आरोप है कि कंपनी ने फिल्म बनाने के लिए राजपाल यादव की कंपनी को पैसे दिए थे। रकम लौटाने के लिए दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद कंपनी ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत केस दर्ज कराया।
पूरा विवाद साल 2010 में शुरू हुआ था, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता-पता लापता’ बनाने के लिए करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई और इसके बाद कर्ज चुकाने में देरी होती रही। अदालत के मुताबिक, कई बार मौका देने के बाद भी तय समय पर रकम जमा नहीं की गई।
सजा और समझौते की कोशिश
निचली अदालत ने अभिनेता और उनकी पत्नी को छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। बाद में हाई कोर्ट ने अपील पर सजा पर अस्थायी रोक लगा दी और समझौते का मौका दिया। राजपाल यादव ने 2.5 करोड़ रुपये देने का वादा किया, लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी एक भी किश्त जमा नहीं हुई।
कोर्ट का सख्त रुख कायम
अब कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि बार-बार वादे तोड़ना गंभीर मामला है। अदालत ने माना कि अभिनेता को कई मौके दिए गए, लेकिन हर बार कोर्ट का भरोसा टूटा।

