गाजियाबाद स्कूल विवाद ने पकड़ा तूल मचा हड़कंप, धर्मांतरण के आरोपों पर पुलिस जांच तेज

गाजियाबाद के सेंट टेरेसा एकेडमी में धर्मांतरण के दबाव के आरोपों से विवाद बढ़ गया है। शिक्षिका की शिकायत के बाद प्रदर्शन हुआ, जबकि स्कूल प्रबंधन ने आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है।

Ghaziabad school conversion controversy

Ghaziabad School Controversy Escalates: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक निजी स्कूल को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मोदीनगर के संतपुरा गली नंबर-6 स्थित सेंट टेरेसा एकेडमी पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं। स्कूल की फिजिकल टीचर अरुणा गोस्वामी ने प्रिंसिपल सिस्टर लूसी पर हिंदू बच्चों और स्टाफ को ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने विरोध करने पर नौकरी से निकाले जाने की शिकायत भी पुलिस से की है।
शिक्षिका ने पुलिस को दी शिकायत

अरुणा गोस्वामी ने मोदीनगर थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि वह साल 2012 से इस स्कूल में फिजिकल टीचर के रूप में काम कर रही थीं। उनका बेटा शिव गोस्वामी भी इसी स्कूल में पढ़ता था। अरुणा के मुताबिक, करीब दो साल पहले नई प्रिंसिपल सिस्टर लूसी के आने के बाद स्कूल का माहौल बदल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू बच्चों के हाथों से कलावा उतरवाया जाता था और गरीब परिवारों के बच्चों को हर रविवार चर्च ले जाया जाता था। वहां उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता था।

महिला स्टाफ पर भी दबाव का आरोप

शिक्षिका का कहना है कि केवल बच्चों पर ही नहीं, बल्कि महिला अध्यापिकाओं पर भी चर्च जाने का दबाव बनाया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में हिंदू त्योहार मनाने की अनुमति नहीं दी जाती थी। इतना ही नहीं, अभिभावकों के साथ भी स्कूल प्रशासन का व्यवहार ठीक नहीं था।
अरुणा ने बताया कि 4 मई 2026 को उन्हें प्रिंसिपल के ऑफिस में बुलाया गया। वहां उनसे हाथ पर लिखा ‘भगवान महादेव’ मिटाने और माथे का टीका हटाने को कहा गया। जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया, तो उसी दिन उन्हें नौकरी से हटा दिया गया।

बेटे को प्रताड़ित करने का भी आरोप

अरुणा का आरोप है कि उनके बेटे शिव पर भी मानसिक दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि चर्च न जाने और कलावा न हटाने की वजह से उनके बेटे को परेशान किया गया। बाद में उसे हॉस्टल भेजा गया, जहां उसकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उसे स्कूल से टीसी देकर निकाल दिया गया।

स्कूल के बाहर हुआ जोरदार प्रदर्शन

मामला सामने आने के बाद मंगलवार को बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता स्कूल पहुंचे। उन्होंने स्कूल गेट पर नारेबाजी की, जय श्री राम लिखा और हनुमान चालीसा का पाठ किया। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल की मान्यता रद्द करने और प्रिंसिपल की गिरफ्तारी की मांग की। स्थिति को देखते हुए स्कूल के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

प्रिंसिपल ने आरोपों को बताया झूठा

प्रिंसिपल सिस्टर लूसी ने सभी आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि स्कूल में सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे को स्कूल ने नहीं निकाला, बल्कि उसके पिता ने खुद मार्च में टीसी के लिए आवेदन दिया था।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पक्षों के बयान दर्ज करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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