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हरीश राणा की अंतिम विदाई का भावुक पल, कैसा है घर में माहौल, कौन थीं विदाई देने वाली सिस्टर

हरीश राणा की इच्छामृत्यु से पहले घर से भावुक विदाई दी गई। सिस्टर लवली ने परिवार के संघर्ष और फैसले के पीछे की कहानी बताई, साथ ही आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की अपील की।

SYED BUSHRA by SYED BUSHRA
March 18, 2026
in गाजियाबाद
harish rana euthanasia emotional farewell story
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Harish rana euthanasia: गाजियाबाद के हरीश राणा को एम्स, नई दिल्ली में भर्ती कराया गया है, जहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इससे पहले उन्हें उनके घर से अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान परिवार के सदस्य मौजूद थे और माहौल बेहद भावुक हो गया था। विदाई का एक वीडियो भी सामने आया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

कौन थीं विदाई देने वाली महिलाएं

वीडियो में दिख रही महिलाओं को लेकर लोगों में काफी सवाल उठे। जानकारी के अनुसार, इनमें से एक ब्रह्माकुमारी संस्था की सिस्टर लवली दीदी हैं। वह हरीश राणा को अंतिम विदाई देने उनके घर पहुंचीं थीं। उन्होंने इस मौके पर परिवार को सांत्वना दी और हरीश के लिए शांति की कामना की।

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13 साल का संघर्ष और मुश्किल फैसला

सिस्टर लवली ने बताया कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि इसके पीछे कई सालों का संघर्ष है। हरीश राणा पिछले 13 साल से गंभीर हालत में थे। उनके पिता अशोक राणा इस फैसले को लेकर भावनात्मक रूप से टूट गए थे, लेकिन मां निर्मला देवी ने हिम्मत दिखाते हुए जरूरी कागजों पर हस्ताक्षर किए और बेटे को दर्द से मुक्ति दिलाने का निर्णय लिया।

हादसे के बाद बदल गई जिंदगी

बताया गया कि हरीश राणा पहले एक सक्रिय और सपने देखने वाले युवक थे, लेकिन एक हादसे के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। लंबे समय तक उनका इलाज चला, लेकिन हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। परिवार ने हर संभव कोशिश की, लेकिन आखिरकार उन्हें यह कठिन फैसला लेना पड़ा।

आध्यात्मिक सोच से मिला सहारा

हरीश का परिवार पिछले कई सालों से ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ा हुआ है। इस आध्यात्मिक जुड़ाव ने उन्हें इस कठिन समय में संभालने में मदद की। सिस्टर लवली ने कहा कि आत्मा हमेशा जीवित रहती है और शरीर केवल एक माध्यम है।

शांति और सकारात्मक सोच का संदेश

विदाई के समय हरीश को तिलक लगाया गया और उन्हें शांति का संदेश दिया गया। सिस्टर लवली ने बताया कि तिलक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि हरीश की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।

परिवार ने झेला आर्थिक और मानसिक दर्द

हरीश के इलाज के दौरान परिवार को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इलाज के लिए उन्हें अपना दिल्ली का घर तक बेचना पड़ा। सालों तक मेडिकल उपकरणों की मदद से उनकी देखभाल की गई, जिससे परिवार पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता गया।

आखिर में सच को स्वीकार किया

सिस्टर लवली ने कहा कि कभी-कभी चमत्कार की उम्मीद रहती है, लेकिन डॉक्टरों की राय के बाद परिवार ने सच्चाई को स्वीकार किया। उन्होंने इसे जीवन के बदलाव के रूप में समझाया और कहा कि जैसे हम कपड़े बदलते हैं, वैसे ही आत्मा भी शरीर बदलती है।

Tags: : Harish Rana storyemotional farewell videoeuthanasia India case
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