Ghaziabad Sisters Suicide: तीन बेटियों को खोने का दर्द, पिता का छलका दुख ,”काश समय पर समझ पाता…” सरकार से किया क्या भावुक अपील

गाजियाबाद की भारत सिटी सोसायटी में तीन नाबालिग बहनों की मौत के बाद पिता ने कोरियन कंटेंट पर रोक की मांग की। पुलिस मोबाइल की जांच कर रही है, वहीं इलाके में डर का माहौल है।

Ghaziabad Sisters Suicide:

Korean Content and Teen Suicide Case:गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र स्थित भारत सिटी सोसायटी में तीन नाबालिग बहनों की मौत के बाद इलाके में शोक और डर का माहौल बना हुआ है। घटना के दूसरे दिन भी सोसायटी में लोगों की भीड़ जुटी रही। लोग इस दर्दनाक घटना से आहत हैं और परिवार के प्रति संवेदना जता रहे हैं।

पिता ने जताया पछतावा

बच्चियों के पिता चेतन कुमार ने मीडिया से बातचीत में गहरा दुख और पछतावा जताया। उन्होंने कहा कि बच्चों को मोबाइल देना उनकी सबसे बड़ी गलती थी। फोन के जरिए वे कोरियन ड्रामा, गेम और ऑनलाइन कंटेंट से जुड़ गई थीं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि देश में कोरियन कंटेंट पर रोक लगाई जाए, ताकि किसी और बच्चे के साथ ऐसा न हो।

कोरियन कंटेंट को बताया जिम्मेदार

चेतन कुमार ने कहा कि उनकी बेटियां कोरियन कल्चर से बहुत प्रभावित थीं। उन्होंने बताया कि सुसाइड नोट में भी बच्चियों ने कोरिया से जुड़ाव और उससे अलग न रह पाने की बात लिखी है।
पिता का कहना है कि दो हफ्ते पहले मोबाइल लेने के बाद बच्चियां तनाव में रहने लगी थीं और चुप-चुप रहने लगी थीं।

सोसायटी में डर का माहौल

घटना के बाद से सोसायटी में रहने वाले बच्चों और अभिभावकों में डर का माहौल है। कई बच्चों को स्कूल नहीं भेजा गया। लोग अपने बच्चों की मोबाइल गतिविधियों को लेकर सतर्क हो गए हैं।पड़ोसियों का कहना है कि परिवार शांत स्वभाव का था और किसी को ऐसी घटना की आशंका नहीं थी।

पुलिस जांच और मोबाइल की फॉरेंसिक रिपोर्ट

पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। बच्चियों के मोबाइल को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद यह साफ हो सकेगा कि वे किन ऐप्स, गेम्स और कंटेंट से जुड़ी हुई थीं। पुलिस परिवार के सदस्यों से भी लगातार पूछताछ कर रही है।

समाज के लिए चेतावनी

यह घटना अभिभावकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, उनकी ऑनलाइन गतिविधियों और भावनात्मक स्थिति पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों से संवाद बनाए रखना और समय-समय पर उनकी काउंसलिंग करना जरूरी है।

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