वायु प्रदूषण बढ़ा सकता है Migraine का खतरा, 10 साल की स्टडी में बड़ा खुलासा

हाल ही में Neurology journal में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण और मौसम में बदलाव Migraine के दौरे को बढ़ा सकते हैं। Ben-Gurion University of the Negev के वैज्ञानिकों ने 7,000 से अधिक मरीजों पर करीब 10 वर्षों तक अध्ययन कर पाया कि प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर माइग्रेन के गंभीर मामलों में अस्पताल जाने वालों की संख्या भी बढ़ जाती है।

Air pollution : अगर आप अक्सर तेज सिरदर्द या Migraine से परेशान रहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हाल ही में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से माइग्रेन के दौरे का खतरा बढ़ सकता है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Neurology journal में प्रकाशित हुआ है, जिसमें मौसम और प्रदूषण दोनों को माइग्रेन से जुड़ा अहम कारण बताया गया है।

मौसम और प्रदूषण दोनों बनते हैं कारण

अध्ययन के अनुसार, केवल हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व ही नहीं, बल्कि मौसम से जुड़े कारक जैसे गर्मी और नमी भी माइग्रेन के जोखिम को प्रभावित करते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये दोनों कारक मिलकर माइग्रेन के दौरे की तीव्रता और आवृत्ति को बढ़ा सकते हैं।

इजरायल के वैज्ञानिकों ने किया शोध

यह रिसर्च Ben-Gurion University of the Negev के वैज्ञानिकों द्वारा की गई है। अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता Ido Paless के अनुसार, बाहरी पर्यावरण माइग्रेन से पीड़ित लोगों को दो तरह से प्रभावित करता है—एक, मौसम से जुड़े कारक जोखिम को बढ़ा या घटा सकते हैं, और दूसरा, प्रदूषण का अचानक बढ़ना दर्द को तुरंत ट्रिगर कर सकता है।

7,000 से अधिक मरीजों पर 10 साल तक चला अध्ययन

यह अध्ययन काफी व्यापक था। इसमें नेगेव क्षेत्र के 7,000 से अधिक माइग्रेन मरीजों को लगभग 10 वर्षों तक ट्रैक किया गया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने यह विश्लेषण किया कि प्रतिभागियों का रोजाना प्रदूषण, वाहन धुएं और धूल के संपर्क से कितना सामना हुआ और इसका उनके स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ा।

शोध में यह भी पाया गया कि जिन दिनों प्रदूषण का स्तर अधिक रहा, उन दिनों माइग्रेन के गंभीर मामलों में अस्पताल जाने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी।

विशेषज्ञों की सलाह: सतर्क रहना जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि माइग्रेन के मरीजों को खराब हवा और अत्यधिक गर्मी से बचने की कोशिश करनी चाहिए। घर से बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग, पर्याप्त पानी पीना और मौसम के अनुसार दिनचर्या में बदलाव करना माइग्रेन के खतरे को कम करने में मददगार हो सकता है।

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