Cinnamon Benefits: दालचीनी भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला लोकप्रिय मसाला है, लेकिन बाजार में मिलने वाली सभी दालचीनी एक जैसी नहीं होती। मुख्य रूप से सीलोन दालचीनी और कैसिया का इस्तेमाल किया जाता है। दोनों दिखने में समान लग सकती हैं, लेकिन उनकी परत, रंग, खुशबू, स्वाद और कूमारिन की मात्रा में अंतर होता है। ऐसे में कुछ आसान संकेतों से इनकी पहचान की जा सकती है।
परतों से करें दालचीनी की पहचान
साबुत दालचीनी खरीदते समय उसकी स्टिक की बनावट पर ध्यान दें। सीलोन दालचीनी कई बेहद पतली परतों से बनी होती है, जो एक-दूसरे के अंदर रोल हुई दिखाई देती हैं। इसके मुकाबले कैसिया की छाल मोटी और सख्त होती है। इसलिए स्टिक के अंदर कई पतली परतें नजर आएं तो उसके सीलोन होने की संभावना अधिक होती है।
रंग और खुशबू में भी अंतर
सीलोन दालचीनी आमतौर पर हल्के भूरे या टैन रंग की होती है, जबकि कैसिया का रंग गहरा भूरा या लालिमा लिए हो सकता है। सीलोन की खुशबू हल्की और मीठी होती है, जबकि कैसिया की महक अधिक तेज और मसालेदार महसूस हो सकती है। हालांकि, केवल रंग या खुशबू से पक्की पहचान नहीं की जा सकती।
पानी वाला टेस्ट कितना भरोसेमंद?
दालचीनी को पानी में डालकर या उबालकर पहचानने का घरेलू तरीका बताया जाता है, लेकिन इसे वैज्ञानिक या पक्का टेस्ट नहीं माना जाना चाहिए। पानी का रंग या स्टिक का नरम होना कई दूसरे कारकों से प्रभावित हो सकता है। इसलिए बनावट और परतों को देखना ज्यादा उपयोगी संकेत है।
पैकेट पर लिखी जानकारी जरूर देखें
अगर सीलोन दालचीनी खरीदनी है तो पैकेट पर ‘Ceylon Cinnamon’ या ‘True Cinnamon’ लिखा देख सकते हैं। केवल ‘Cinnamon’ लिखा होने से यह तय नहीं होता कि वह सीलोन है। साबुत दालचीनी में उसकी बनावट देखकर पहचान करना पाउडर की तुलना में आसान होता है।
कूमारिन की मात्रा में होता है बड़ा अंतर
सीलोन और कैसिया में एक महत्वपूर्ण अंतर कूमारिन की मात्रा का है। कैसिया में कूमारिन अपेक्षाकृत अधिक पाया जाता है। बहुत ज्यादा मात्रा में लंबे समय तक इसका सेवन कूमारिन के सेवन को बढ़ा सकता है, जो लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए रोजाना ज्यादा मात्रा में दालचीनी लेने वालों को इसकी किस्म और मात्रा पर ध्यान देना चाहिए। लिवर की बीमारी होने पर नियमित अधिक सेवन से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर है।

