Site icon News1India

FSSAI Paneer Alert : स्टार्च वाला उत्पाद अब पनीर नहीं कहलाएगा, जानिए कैसे पहचाने एनालॉग पनीर और पनीर का फर्क

अगर कोई उत्पाद दूध से बने पनीर के बजाय स्टार्च, वनस्पति तेल या दूसरे गैर-डेयरी घटकों से तैयार किया गया है, तो उसे पनीर के नाम से बेचने पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। FSSAI ने 22 सितंबर 2026 को इस संबंध में ड्राफ्ट जारी किया है और लोगों से 60 दिन के भीतर सुझाव या आपत्तियां मांगी हैं।

प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘Analogue in Dairy Context’ श्रेणी में लाइसेंस या पंजीकरण वाले उत्पाद भी अपने नाम, लेबल और प्रचार में ‘Paneer’ शब्द का इस्तेमाल बंद करेंगे। इसका मकसद ग्राहक को खरीदारी के समय उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और सामग्री की स्पष्ट जानकारी देना है।

पहले भी दिए निर्देश

FSSAI पहले भी चीज एनालॉग को पनीर के नाम से बेचने को लेकर कार्रवाई की बात कह चुका है। अप्रैल 2026 में जारी सार्वजनिक नोटिस में भी चीज एनालॉग को ‘पनीर’ बताकर बेचने को नियमों का उल्लंघन बताया गया था।

यानी बाजार में ऐसा उत्पाद मौजूद हो सकता है जो दिखने में पनीर जैसा हो, लेकिन उसमें दूध से मिलने वाले घटकों की जगह दूसरे पदार्थ इस्तेमाल किए गए हों। नए ड्राफ्ट में ऐसे उत्पादों की पहचान और नामकरण को और स्पष्ट करने का प्रस्ताव है।

घर पर ऐसे जांचें

पनीर में स्टार्च की मिलावट की जांच के लिए उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से एक घरेलू तरीका बताया गया है। थोड़े से पनीर को पानी के साथ उबालकर ठंडा करें और उसमें आयोडीन घोल की कुछ बूंदें डालें। अगर रंग नीला हो जाता है तो स्टार्च की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है।

दूसरा तरीका पनीर की बनावट और रंग देखना है। मानक पनीर का रंग आम तौर पर दूधिया सफेद और बनावट सघन, मुलायम तथा एकसार होनी चाहिए। हालांकि केवल देखकर मिलावट की पक्की पुष्टि नहीं की जा सकती।

तीसरा तरीका पैकेट का लेबल पढ़ना है। खरीदते समय देखें कि उत्पाद में दूध से बने घटक लिखे हैं या वनस्पति तेल, स्टार्च अथवा दूसरे विकल्प। सिर्फ नाम या तस्वीर देखकर इसे असली पनीर मानना सही नहीं है।

ध्यान रखें कि घर पर किया गया आयोडीन परीक्षण केवल स्टार्च की मौजूदगी का संकेत देता है। इसे पनीर की पूरी गुणवत्ता या सुरक्षा की अंतिम वैज्ञानिक जांच नहीं माना जाना चाहिए।

Exit mobile version