World Vegan Day: हर साल 1 नवंबर को World Vegan Day मनाया जाता है। आज के समय में लोग अपनी खानपान की आदतों में बदलाव सिर्फ फिटनेस या वजन कम करने के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण और पशु कल्याण को ध्यान में रखकर भी कर रहे हैं। इसी वजह से वीगन डाइट की लोकप्रियता बढ़ रही है। हालांकि, कई लोग वीगन और शाकाहारी भोजन को एक जैसा समझते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर है।
क्या होती है वीगन डाइट?
वीगन डाइट पूरी तरह प्लांट-बेस्ड होती है। इसमें जानवरों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों को शामिल नहीं किया जाता। मांस, मछली और अंडे के अलावा दूध, दही, घी, पनीर और शहद भी इस डाइट का हिस्सा नहीं होते।
वहीं, सामान्य शाकाहारी भोजन में मांस और मछली नहीं खाई जाती, लेकिन दूध, दही, घी और पनीर जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन किया जा सकता है। यही दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर है।
वीगन लाइफस्टाइल सिर्फ खाने तक सीमित नहीं
वीगनिज्म केवल खानपान का तरीका नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल भी है। इसे अपनाने वाले लोग अपनी क्षमता के अनुसार जानवरों से मिलने वाले दूसरे उत्पादों से भी दूरी बनाने की कोशिश करते हैं। इसमें चमड़े, ऊन और सिल्क से बनी चीजें शामिल हो सकती हैं।
वीगन डाइट में क्या-क्या खा सकते हैं?
वीगन डाइट में कई तरह के पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। गेहूं, चावल, ओट्स, बाजरा और मक्का जैसे अनाज के साथ अरहर, मूंग, मसूर और चना जैसी दालें खाई जा सकती हैं।
इसके अलावा फल, हरी सब्जियां, बादाम, अखरोट, काजू, मूंगफली, चिया सीड्स और अलसी भी इस डाइट का हिस्सा हैं। दूध की जगह सोया, बादाम, नारियल और ओट मिल्क जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जाते हैं। पनीर की जगह टोफू खाया जा सकता है, जो प्रोटीन का अच्छा स्रोत है।
सेहत के लिए कितनी फायदेमंद है वीगन डाइट?
संतुलित वीगन डाइट में फाइबर, विटामिन, मिनरल और दूसरे जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं। फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और नट्स से भरपूर खानपान पाचन, हृदय स्वास्थ्य और वजन प्रबंधन में मदद कर सकता है।
हालांकि, वीगन डाइट अपनाते समय पोषण का ध्यान रखना जरूरी है। खासतौर पर विटामिन B12, आयरन, कैल्शियम, विटामिन D, ओमेगा-3 और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करनी चाहिए। विटामिन B12 के लिए फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ या डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए वीगन डाइट शुरू करने से पहले अपनी जरूरत के अनुसार भोजन की योजना बनाना बेहतर है। केवल दूध और मांस छोड़ देना संतुलित पोषण की गारंटी नहीं है।

