S A Desert Greening Vision 2030: इस्लामिक मान्यताओं में कयामत से पहले के कुछ संकेतों का जिक्र मिलता है, जिनमें अरब की रेगिस्तानी जमीन के हरी-भरी होने की बात भी कही जाती है। इसी वजह से सऊदी अरब की रेगिस्तानी जमीन को हरा-भरा करने की कोशिशों को कुछ लोग धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, वैज्ञानिक और सरकारी स्तर पर इसे पर्यावरण संरक्षण, भूमि बहाली और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
ग्रीन इनिशिएटिव शुरू
सऊदी अरब ने वर्ष 2021 में अपने विजन 2030 कार्यक्रम के तहत सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य केवल बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना नहीं, बल्कि बंजर और खराब हो चुकी भूमि को दोबारा बहाल करना और देश में हरित क्षेत्र बढ़ाना है। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। इस अभियान के तहत सरकार ने आने वाले वर्षों के लिए बड़े लक्ष्य तय किए हैं।
अरबों पेड़ लगाने का लक्ष्य
सऊदी अरब की योजना 2030 तक देश में 10 अरब पेड़ लगाने और करीब 40 मिलियन हेक्टेयर भूमि को बहाल करने की है। इस दिशा में पिछले कुछ वर्षों में काम भी आगे बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 तक करीब 2.5 लाख हेक्टेयर भूमि को बहाल किया गया था। वर्ष 2026 की शुरुआत तक यह क्षेत्र बढ़कर लगभग 10 लाख हेक्टेयर बताया गया। अब सरकार का लक्ष्य 2030 तक करीब 25 लाख हेक्टेयर भूमि को दोबारा हरा-भरा करने की दिशा में आगे बढ़ना है।
पानी का निकाला हल
रेगिस्तानी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के सामने सबसे बड़ी चुनौती पानी की उपलब्धता है। इसके लिए सऊदी अरब बारिश के पानी को जमा करने और उसका उपयोग करने पर जोर दे रहा है। कई इलाकों में बांधों में जमा पानी का इस्तेमाल पौधों की सिंचाई के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा कुछ स्थानों पर ट्रीटेड अपशिष्ट जल का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तरह पानी के वैकल्पिक स्रोतों के जरिए पेड़ों और पौधों को लंबे समय तक जीवित रखने की कोशिश की जा रही है।
यूएन ने सराहा प्रयास
सऊदी अरब की भूमि बहाली और हरियाली बढ़ाने की पहल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हुई है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मरुस्थलीकरण रोकथाम प्रयासों के तहत इस तरह की पहलों को महत्वपूर्ण माना गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उचित योजना, वैज्ञानिक तकनीक और लंबे समय तक लगातार प्रयास किए जाएं तो दुनिया के बेहद शुष्क क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर भूमि बहाली संभव है। सऊदी अरब की पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।
शहरों और हाईवे पर हरियाली
सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव का दायरा केवल रेगिस्तानी इलाकों तक सीमित नहीं है। रियाद सहित कई शहरों में नए पार्क और ग्रीन स्पेस विकसित किए जा रहे हैं। हाईवे के किनारे भी बड़ी संख्या में पेड़ लगाने की योजनाओं पर काम हो रहा है। इसके साथ ही चरागाहों और प्राकृतिक जंगलों को बहाल करने की कोशिश की जा रही है। इन परियोजनाओं में सरकार के साथ निजी कंपनियां और गैर-सरकारी संगठन भी भागीदारी कर रहे हैं।
2030 का बड़ा लक्ष्य
सऊदी अरब की पर्यावरणीय योजना केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है। सरकार ने 2030 तक देश की 50 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय ऊर्जा से पैदा करने का भी लक्ष्य रखा है। इसके अलावा जंगलों, वन्यजीवों और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कभी अपनी अर्थव्यवस्था और पहचान के लिए तेल पर निर्भर रहने वाला सऊदी अरब अब पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में भी अपनी नई पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, 10 अरब पेड़ लगाने और बड़े पैमाने पर भूमि बहाली के लक्ष्यों को हासिल करने में पानी की उपलब्धता और कठोर जलवायु जैसी चुनौतियां महत्वपूर्ण रहेंगी।
