China Tariff Network: किसने रिपोर्ट में किया दावा, क्या भारत के रास्ते अमेरिका पहुंच रहा चीनी सामान?

अमेरिकी रिपोर्ट में भारत समेत 40 से ज्यादा देशों पर चीन के सामान को तीसरे देशों के जरिए अमेरिका भेजकर टैरिफ से बचने में मदद करने का दावा किया गया है।

China Tariff Evasion Through India: अमेरिका ने चीन के कथित ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क को लेकर एक नई रिपोर्ट जारी की है। इसमें भारत समेत 40 से ज्यादा देशों का नाम लिया गया है। रिपोर्ट का दावा है कि चीन अपने सामान को सीधे अमेरिका भेजने के बजाय दूसरे देशों के रास्ते अमेरिकी बाजार तक पहुंचा रहा है, जिससे उस पर लगाए गए भारी टैरिफ से बचने की कोशिश की जाती है। यह दावा पीटर नवारो की रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम’ में किया गया है।

तीसरे देश का रास्ता

रिपोर्ट के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क में सामान की मामूली प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, लेबलिंग या बिलिंग में बदलाव किया जा सकता है। इसके बाद माल को किसी तीसरे देश से अमेरिका भेजा जाता है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इससे सामान का मूल देश चीन के बजाय दूसरे देश का दिखाई देने लगता है, जबकि उसमें इस्तेमाल होने वाली बड़ी मात्रा में सामग्री चीन से ही आती है।

भारत का उत्पादन बेल्ट

अमेरिकी रिपोर्ट में भारत के पुणे-गुजरात-चेन्नई उत्पादन गलियारे का भी विशेष रूप से जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि चीन से आने वाले पंप और कंप्रेसर जैसे उत्पाद इस नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। दावा है कि इन उत्पादों को भारत के रास्ते अमेरिकी बाजार में पहुंचाया जा सकता है और इसका असर अमेरिका की औद्योगिक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। हालांकि, ये रिपोर्ट में लगाए गए अमेरिकी आरोप हैं, किसी भारतीय सरकारी जांच का निष्कर्ष नहीं।

कितने देशों पर नजर

अमेरिका ने इस कथित नेटवर्क में भारत के अलावा कनाडा, मैक्सिको, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ समेत कई बड़े व्यापारिक साझेदारों का नाम लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में मेक्सिको, भारत और वियतनाम के रास्ते करीब 67 अरब डॉलर का ऐसा सामान अमेरिका पहुंचने का अनुमान है, जिसे अमेरिकी पक्ष चीन से ट्रांसशिप किया हुआ मानता है। इससे अमेरिकी सरकार को करीब 28 अरब डॉलर के शुल्क राजस्व का नुकसान होने का दावा भी किया गया है।

अब AI से होगी निगरानी

अमेरिका ऐसे कथित शिपमेंट की पहचान के लिए ‘डिटेक्टिव बॉर्डर’ नाम की AI आधारित प्रणाली इस्तेमाल करने की तैयारी में है। यह सिस्टम शिपमेंट रिकॉर्ड, रूटिंग हिस्ट्री, उत्पाद वर्गीकरण, कंपनियों के स्वामित्व संबंध, उत्पादन क्षमता और संदिग्ध गतिविधियों जैसे डेटा का विश्लेषण करेगा। इसके जरिए अमेरिकी अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि कोई सामान वास्तव में कहां बना है और क्या उसे टैरिफ से बचाने के लिए किसी तीसरे देश के रास्ते भेजा गया है।

भारत पर क्या असर

अमेरिकी रिपोर्ट में भारत का नाम आने से दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि रिपोर्ट में भारत को लेकर किए गए दावों को आरोप के रूप में ही देखना जरूरी है। भारत के रास्ते अमेरिका पहुंचने वाले हर चीनी उत्पाद को अवैध ट्रांसशिपमेंट मानना सही नहीं होगा। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि अमेरिकी अधिकारी इन दावों के आधार पर आगे क्या जांच या कार्रवाई करते हैं।

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