भारत से पिटने के बाद आसिम मुनीर को बड़ा सम्मान, बने पाकिस्तान के दूसरे फील्ड मार्शल!

भारत से करारी हार के बाद शहबाज शरीफ सरकार ने एक अजीबोगरीब फैसला लिया है। मंगलवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में आर्मी चीफ आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत कर दिया गया है।

Asim Munir Field Marshal

Asim Munir Field Marshal : भारत से करारी हार के बाद पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने एक हैरान करने वाला और विवादित कदम उठाया है। मंगलवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को ‘फील्ड मार्शल’ की सर्वोच्च सैन्य उपाधि से सम्मानित किया। पाकिस्तान के सैन्य इतिहास में यह केवल दूसरी बार है जब किसी अधिकारी को यह सम्मान मिला है। इससे पहले यह उपाधि 1959 में जनरल अय्यूब खान को दी गई थी।

क्यों मिला आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा?

बताया जा रहा है कि आसिम मुनीर को यह पद ‘ऑपरेशन बुनियाल-अल-मरसूस’ के दौरान भारत के खिलाफ बनाई गई रणनीति के लिए दिया गया है। हालांकि यह फैसला काफी हैरान करने वाला है, क्योंकि भारत ने उस ऑपरेशन के जवाब में पाकिस्तान में कई आतंकी अड्डों को निशाना बनाकर भारी नुकसान पहुंचाया है। पाकिस्तान की ओर से किए गए ड्रोन हमलों को भारत ने विफल कर दिया और जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब पाकिस्तान को इतनी बड़ी क्षति हुई है, तो आखिर किस आधार पर इतनी बड़ी पदोन्नति दी गई?

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इस मीटिंग में एक और बड़ा फैसला लिया गया, जिसमें वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू का कार्यकाल भी बढ़ा दिया गया है। बताया गया कि हालिया सैन्य संघर्षों में उनके नेतृत्व और सेवाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। फील्ड मार्शल की उपाधि सेना की सबसे ऊंची और सम्मानजनक रैंक होती है, जिसे केवल असाधारण सैन्य सेवाओं के लिए दिया जाता है। यह एक स्थायी पद होता है, जो रिटायरमेंट के बाद भी बना रहता है। इस रैंक पर अधिकारी को पांच सितारे दिए जाते हैं और इसे नियमित सैन्य पदों की श्रेणी में नहीं गिना जाता।

अय्यूब खान के बाद पहला फील्ड मार्शल

यह उल्लेखनीय है कि जनरल अय्यूब खान को 1959 में फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई थी। वह 1958 से 1969 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे और उन्हें यह रैंक विशेष रूप से उनकी सैन्य और राजनीतिक भूमिका, खासकर 1958 में देश में मार्शल लॉ लागू करने के कारण प्रदान की गई थी। उनके बाद अब तक किसी भी अधिकारी को यह पद नहीं मिला था — लेकिन अब जनरल आसिम मुनीर को यह सम्मान दिया गया है।

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