Strategic Base: डिएगो गार्सिया हिंद महासागर के बीच स्थित अमेरिका और ब्रिटेन का बेहद महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है। अमेरिका लंबे समय से इस बेस का इस्तेमाल अपनी रणनीतिक सैन्य गतिविधियों के लिए करता आया है। यहां एक बड़ा एयरफील्ड मौजूद है, जहां से अमेरिकी बॉम्बर विमान ऑपरेशन कर सकते हैं। इसके अलावा बेस पर अमेरिकी स्पेस फोर्स से जुड़ी गतिविधियां भी होती हैं। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे हिंद महासागर में अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र बनाती है।
जहाजों से पनडुब्बियों तक
डिएगो गार्सिया सिर्फ हवाई अभियानों के लिए ही अहम नहीं है, बल्कि अमेरिकी नौसेना के लिए भी इसका काफी महत्व है। यहां बड़े नौसैनिक जहाजों और परमाणु पनडुब्बियों से जुड़ी सुविधाएं मौजूद हैं। बेस का विशाल लैगून समुद्र में तैनात अमेरिकी लॉजिस्टिक और सप्लाई जहाजों को सुरक्षित जगह उपलब्ध कराता है। यही वजह है कि इस द्वीप पर होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि को अमेरिका और ब्रिटेन की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीरता से देखा जाता है।
मिसाइल के बाद नई चुनौती
डिएगो गार्सिया पहले भी संभावित सैन्य खतरों के दायरे में रह चुका है। इपिक फ्यूरी अभियान के दौरान ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों को इस सैन्य अड्डे की दिशा में दागे जाने की बात सामने आई थी। अब अज्ञात ड्रोन की मौजूदगी ने सुरक्षा को लेकर एक अलग चिंता पैदा कर दी है। ड्रोन आकार में छोटे होते हैं, कम ऊंचाई पर उड़ सकते हैं और उन्हें काफी दूरी से नियंत्रित या लॉन्च किया जा सकता है। ऐसे में समुद्र से घिरे किसी सैन्य द्वीप के लिए इनका पता लगाना और रोकना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ब्रिटेन ने मानी ड्रोन की मौजूदगी
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने डिएगो गार्सिया के ऊपर ड्रोन देखे जाने की रिपोर्ट की पुष्टि की है। हालांकि, मंत्रालय ने यह बताने से इनकार किया कि ड्रोन किस समय दिखाई दिए थे। इनकी संख्या, प्रकार और इन्हें संचालित करने वाले व्यक्ति या संगठन के बारे में भी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिकी और ब्रिटिश कमांडर बेस पर मौजूद लोगों और सैन्य सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदमों पर विचार कर रहे हैं और उन्हें लागू कर रहे हैं।
अमेरिका ने भी साधी चुप्पी
अमेरिकी अधिकारियों ने भी घटना से जुड़ी विस्तृत जानकारी देने से परहेज किया है। अमेरिकी पैसिफिक कमांड के एक अधिकारी ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कहा कि सैन्य ठिकानों पर सुरक्षा व्यवस्था या किसी विशेष सुरक्षा कदम की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। अमेरिका ने केवल इतना स्पष्ट किया कि उसकी सेना अपने कर्मचारियों और सैन्य सुविधाओं की सुरक्षा के लिए सतर्क है। इस बीच 7 अगस्त को एक एयरफोर्स सोशल मीडिया पेज पर डिएगो गार्सिया के फ्यूल फार्म के पास ड्रोन दिखने और सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक कर्फ्यू लगाए जाने का दावा किया गया था। हालांकि, यह आधिकारिक सैन्य चैनल नहीं है और कथित कर्फ्यू की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।
आखिर ड्रोन किसके थे?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि डिएगो गार्सिया के ऊपर दिखाई देने वाले ड्रोन किसके थे और वहां तक कैसे पहुंचे। अमेरिका और ब्रिटेन ने अभी तक इनके ऑपरेटर, लॉन्च पॉइंट, उद्देश्य या तकनीकी क्षमता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। अगर ड्रोन समुद्र से लॉन्च किए गए थे, तो यह सैन्य बेस की सुरक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती का संकेत हो सकता है। खासकर अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण माहौल में इस घटना की अहमियत और बढ़ जाती है। फिलहाल जांच पूरी होने तक ड्रोन के पीछे किसका हाथ था, इस पर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
