फ्रांस में कैमरा लगे स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल को लेकर पुलिस और डेटा प्राइवेसी अधिकारियों ने जांच तेज कर दी है। मामला खास तौर पर उन वीडियो से जुड़ा है, जिनमें महिलाओं को उनकी जानकारी या सहमति के बिना रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया। पेरिस अभियोजक कार्यालय ने ऐसे मामलों में कम से कम एक आपराधिक जांच शुरू की है।
महिलाओं की रिकॉर्डिंग का मामला
जांच उस सोशल मीडिया ट्रेंड से जुड़ी है, जिसमें स्मार्ट चश्मे पहनकर सड़क पर महिलाओं की वीडियो रिकॉर्ड की गईं। बाद में इन वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया। अधिकारियों ने डिवाइस का ब्रांड सार्वजनिक नहीं किया है। पेरिस अभियोजक कार्यालय की साइबर क्राइम यूनिट ने करीब दो सप्ताह पहले स्मार्ट चश्मों का परीक्षण भी किया, ताकि यह समझा जा सके कि इनका इस्तेमाल किन तरह के अपराधों में हो सकता है।
फ्रांस की डेटा प्राइवेसी संस्था CNIL को कार्यस्थलों पर स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल से जुड़ी 10 से कम शिकायतें मिली हैं। कई कंपनियां यह भी पूछ रही हैं कि क्या वे अपने परिसर में कैमरा वाले स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक लगा सकती हैं।
सात करोड़ चश्मे बिके
स्मार्ट चश्मों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। Meta और EssilorLuxottica के बनाए चश्मे दुनिया के बाजार में करीब 76% हिस्सेदारी रखते हैं। Meta के AI स्मार्ट चश्मों की 2025 में करीब 70 लाख यूनिट बिकी थीं। 2026 में बिक्री और तेजी से बढ़ने के संकेत मिले हैं।
इन चश्मों में कैमरा और माइक्रोफोन लगे होते हैं। इन्हें फोन से जोड़ा जा सकता है और कई काम आवाज के जरिए किए जा सकते हैं। रिकॉर्डिंग के दौरान फ्रेम में एक छोटी लाइट जलती है, लेकिन प्राइवेसी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल इस लाइट से लोगों की सहमति सुनिश्चित नहीं होती।
यूरोप में बढ़ी चिंता
फ्रांस अकेला देश नहीं है जहां स्मार्ट चश्मों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ब्रिटेन के कुछ सिनेमाघरों ने इनके इस्तेमाल पर रोक लगाई है। जर्मनी में एक उपभोक्ता संगठन ने Meta और इससे जुड़े अन्य पक्षों के खिलाफ प्राइवेसी कानूनों के आधार पर शिकायत की है। ऑस्ट्रेलिया भी सरकारी कार्यस्थलों में कैमरा वाले स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक लगाने पर विचार कर रहा है।
फ्रांस में निजी जगह पर किसी व्यक्ति की बिना सहमति तस्वीर या वीडियो रिकॉर्ड करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। CNIL के मुताबिक स्मार्ट चश्मे इस नियम के सामने नई चुनौती खड़ी कर रहे हैं, क्योंकि सामने वाले व्यक्ति को यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि उसकी रिकॉर्डिंग हो रही है या नहीं।
मामला तकनीक से आगे
फ्रांस की संस्था e-Enfance के मुताबिक 2026 की शुरुआत से महिलाओं को बिना जानकारी कैमरा लगे चश्मों से रिकॉर्ड किए जाने की 20 से ज्यादा शिकायतें मिली हैं। संस्था ने ऐसे मामलों को बढ़ती डिजिटल हिंसा और निजता से जुड़ी समस्या बताया है।

