Gulf Crisis Impact: भारत के गैस सप्लाई सिस्टम पर बड़ा सवाल, IGU ने पाइपलाइन नेटवर्क मजबूत करने की दी चेतावनी

IGU ने भारत को चेताया है कि बढ़ते गैस आयात के साथ पाइपलाइन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मजबूत करना जरूरी है। खाड़ी संकट ने ऊर्जा सुरक्षा की चिंताएं बढ़ाई हैं, इसलिए 2030 लक्ष्य के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है।

Gulf Crisis Impact: खाड़ी युद्ध के दौरान भारत को गैस सप्लाई के मोर्चे पर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। LPG सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारें लगीं और कई जगह डिलीवरी व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा। इस दौरान गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। अब इंटरनेशनल गैस यूनियन यानी IGU की नई रिपोर्ट ने भारत की गैस सप्लाई व्यवस्था को लेकर एक अहम चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में भारत के लिए सिर्फ गैस का आयात बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। देश को गैस को लोगों और उद्योगों तक पहुंचाने के लिए मजबूत पाइपलाइन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तैयार करना होगा।

इंपोर्ट नहीं पूरा समाधान

IGU ने अपनी रिपोर्ट में भारत के गैस ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गैस का आयात लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसे देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए जरूरी नेटवर्क अभी पर्याप्त मजबूत नहीं है। इसका मतलब यह है कि अगर भारत ज्यादा LNG या प्राकृतिक गैस आयात भी करता है, तो कमजोर पाइपलाइन और वितरण व्यवस्था उसकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने में बाधा बन सकती है। IGU का मानना है कि भारत को गैस सप्लाई मजबूत करने के लिए ट्रांसमिशन लाइनों, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और स्थानीय डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में तेजी से निवेश करना होगा।

होर्मुज संकट ने बढ़ाई चिंता

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक खाड़ी क्षेत्र में पैदा होने वाला तनाव है। भारत गैस की जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों से पूरा करता है। ऐसे में होर्मुज संकट के दौरान समुद्री रास्तों पर आने वाली रुकावट ने भारत की चिंता बढ़ा दी। शिपिंग में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का करीब 60 से 65 फीसदी प्राकृतिक गैस आयात करता है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र पर ज्यादा निर्भरता और समुद्री रास्तों में किसी संभावित व्यवधान से देश के सामने ऊर्जा सुरक्षा का संकट खड़ा हो सकता है।

सस्ती गैस का फायदा

IGU के मुताबिक, अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होता है और वैश्विक स्थिति सामान्य होती है, तो आने वाले समय में LNG की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इससे भारत को अपेक्षाकृत सस्ती गैस उपलब्ध होने का फायदा मिल सकता है। हालांकि, इस अवसर का लाभ उठाने के लिए भारत को पहले से तैयारी करनी होगी। देश में नई ट्रांसमिशन लाइनें बिछाने, पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार करने और गैस टर्मिनल से उपभोक्ताओं तक कनेक्टिविटी बेहतर करने की जरूरत है। इसके अलावा LNG टर्मिनल क्षमता की बुकिंग और सिस्टम एंट्री चार्ज जैसी व्यवस्थाओं को भी बेहतर बनाना होगा। अगर गैस सस्ती मिलती है लेकिन उसे पहुंचाने का इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर रहता है, तो इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा।

2030 लक्ष्य की चुनौती

IGU की यह रिपोर्ट भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार 2030 तक देश की ऊर्जा जरूरतों में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। LPG सिलेंडर के साथ-साथ पाइपलाइन के जरिए मिलने वाली PNG गैस का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना है। उर्वरक, स्टील, सिरेमिक, रिफाइनरी और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी प्राकृतिक गैस की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। खाड़ी संकट के दौरान भी पाइपलाइन गैस के इस्तेमाल और सप्लाई नेटवर्क की अहमियत सामने आई थी। ऐसे में भारत के लिए चुनौती साफ है कि केवल आयात बढ़ाने से गैस आधारित अर्थव्यवस्था का लक्ष्य पूरा नहीं होगा। इसके लिए मजबूत पाइपलाइन नेटवर्क, बेहतर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम और पर्याप्त गैस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना भी उतना ही जरूरी होगा।

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