ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद कई देशों ने ईरानी एयरलाइंस की उड़ानों को रोक दिया है। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके विमानों को उड़ने और एयरपोर्ट सुविधाओं का इस्तेमाल करने से रोका गया, तो क्षेत्र के दूसरे देशों की उड़ानें भी प्रभावित हो सकती हैं।
ईरान ने क्या कहा
ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सलाहकार मोहम्मद मुखबर ने कहा कि अगर ईरानी विमानों को उड़ान भरने और एयरपोर्ट सेवाएं लेने की अनुमति नहीं दी गई, तो क्षेत्र के किसी भी देश को हवाई सेवाएं चलाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान की रणनीति साफ है- या तो क्षेत्र में सभी के लिए हवाई यात्रा उपलब्ध हो या किसी के लिए नहीं।
इस बयान को ईरान की ओर से उन देशों के लिए चेतावनी माना जा रहा है, जिन्होंने अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत ईरानी एयरलाइंस पर रोक लगाई है।
कई देशों ने रोकी उड़ानें
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद ईरानी विमानों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही पर दबाव बढ़ा है। संयुक्त अरब अमीरात ने 24 सितंबर से ईरानी एयरलाइंस की देश में आने-जाने वाली सभी उड़ानें अगली सूचना तक रोक दी हैं। यूएई के विमानन प्राधिकरण ने यह फैसला अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण लिया है।
इसके अलावा ओमान और इराक के साथ भी ईरानी उड़ानों में रुकावट आई है। ईरान ने पहले ही बगदाद और मस्कट की उड़ानें रद्द होने की जानकारी दी थी। अजरबैजान और जॉर्जिया ने भी ईरानी उड़ानों पर रोक लगाई है।
हर दिन सौ उड़ानों का नेटवर्क
ईरान से रोजाना बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित होती हैं। इनमें खाड़ी देशों के अलावा तुर्किये, इराक और अन्य देशों के लिए सेवाएं शामिल हैं। प्रतिबंधों के कारण इस नेटवर्क का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा है।
मौजूदा स्थिति में ईरानी एयरलाइंस को विदेशी एयरपोर्ट पर ईंधन, लैंडिंग और दूसरी ग्राउंड सेवाएं मिलने में भी परेशानी बढ़ी है। अमेरिका ने उन कंपनियों और एयरपोर्ट सेवा प्रदाताओं पर कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइंस के साथ कारोबार जारी रखते हैं।
हवाई सफर पर असर
ईरान की चेतावनी के बाद क्षेत्रीय हवाई यातायात को लेकर चिंता बढ़ गई है। अगर तनाव और बढ़ता है तो उड़ानों के रूट बदलने, सेवाएं रद्द होने और यात्रियों को वैकल्पिक एयरपोर्ट का इस्तेमाल करने जैसी स्थिति बन सकती है।
हालांकि ईरान ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह दूसरे देशों के एयरपोर्ट या उनकी उड़ानों को रोकने के लिए किस तरह की कार्रवाई करेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक किसी दूसरे संप्रभु देश के एयरपोर्ट को सीधे बंद करने का अधिकार ईरान के पास नहीं है।

