Oil Windfall: ईरान युद्ध से तेल कंपनियों की चांदी, दिग्गज कंपनियों ने कमाए अरबों डॉलर; महंगाई से जूझ रही दुनिया

ईरान युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से दुनिया की छह बड़ी तेल कंपनियों ने रिकॉर्ड मुनाफा कमाया। दूसरी ओर, ईंधन महंगा होने से कई देशों में महंगाई बढ़ी और आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया।

Oil Windfall: ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। युद्ध के दौरान तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ी आशंकाओं ने कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया। इसका सबसे बड़ा फायदा दुनिया की प्रमुख तेल कंपनियों को मिला, जिन्होंने कुछ ही महीनों में अरबों डॉलर का रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया। वहीं दूसरी ओर पेट्रोल, डीजल और गैस महंगी होने से कई देशों में महंगाई बढ़ गई और आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।

रिकॉर्ड मुनाफा

रिपोर्ट के मुताबिक छह प्रमुख तेल कंपनियों ने मिलकर करीब 93 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया। इनमें सऊदी अरामको, एक्सॉनमोबिल, शेवरॉन, बीपी, शेल और टोटलएनर्जीज जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। कई कंपनियों का मुनाफा पिछले वर्ष की तुलना में 40 प्रतिशत से लेकर दोगुना और कुछ मामलों में चार गुना तक बढ़ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की ऊंची कीमतें और आपूर्ति संबंधी संकट इस कमाई की सबसे बड़ी वजह रहे।

महंगाई की मार

तेल महंगा होने का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। परिवहन खर्च बढ़ने से खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा के सामान और औद्योगिक उत्पादों की लागत भी बढ़ गई। एशिया सहित कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेजी आई, जिससे महंगाई पर दबाव और बढ़ गया। कुछ जगहों पर ईंधन की कमी और राशनिंग जैसी स्थिति भी देखने को मिली।

बढ़ी आलोचना

रिकॉर्ड मुनाफे के बाद तेल कंपनियों पर आलोचना भी तेज हो गई। कई विशेषज्ञों और पर्यावरण संगठनों ने आरोप लगाया कि युद्ध और वैश्विक संकट के बीच कंपनियां भारी कमाई कर रही हैं, जबकि आम लोग महंगाई का सामना कर रहे हैं। कुछ राजनीतिक नेताओं ने भी कंपनियों से ईंधन की कीमतें कम करने और उपभोक्ताओं को राहत देने की अपील की है।

आगे क्या होगा?

विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं होता तो तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि कूटनीतिक प्रयासों के चलते कीमतों में कुछ नरमी की उम्मीद भी जताई जा रही है। फिर भी ऊर्जा बाजार की स्थिति आने वाले महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

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