Site icon News1India

Iran Warns US,: ईरान ने अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी, बढ़ते तनाव के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले तेज़

Middle East Tension: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने कहा है कि यदि अमेरिका अगले कुछ दिनों तक सैन्य कार्रवाई जारी रखता है, तो संघर्ष और अधिक व्यापक तथा गंभीर रूप ले सकता है। उनका कहना है कि ईरान अब केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। हालांकि, यह बयान ईरानी पक्ष का आधिकारिक दावा है और घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग देशों के अपने-अपने दावे और आकलन सामने आ रहे हैं।

अमेरिकी ठिकानों को लेकर दी सख्त चेतावनी

मोहसेन रेजाई ने एक साक्षात्कार में कहा कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी निशाने पर आ सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने क्षेत्रीय हालात का गलत आकलन किया है और संघर्ष को व्यापक बनाने का जोखिम बढ़ाया है। रेजाई के अनुसार, ईरान अब तक संयम बरतता रहा है, लेकिन हालात बिगड़ने पर वह अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव कर सकता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी

ईरानी सैन्य सलाहकार ने संकेत दिया कि यदि तनाव और बढ़ा, तो ईरान अपनी अतिरिक्त सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने अमेरिका को किसी भी संभावित जमीनी सैन्य अभियान से बचने की चेतावनी भी दी। रेजाई का दावा है कि भविष्य में मिसाइल और ड्रोन हमलों की तीव्रता बढ़ सकती है। वहीं, अमेरिका की ओर से इन बयानों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

खाड़ी देशों से संयम बरतने की अपील

रेजाई ने कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन सहित खाड़ी क्षेत्र के देशों के नागरिकों से भी तनाव कम करने में सहयोग की अपील की। उनका कहना था कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना सभी देशों के हित में है। इसी बीच ईरानी मीडिया में यह भी दावा किया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नियमों का उल्लंघन करने वाले एक जहाज के खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि, इस घटना से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

मध्य पूर्व की स्थिति पर बनी हुई है वैश्विक नजर

हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमलों और जवाबी कार्रवाई के दावे कर रहे हैं। इस कारण पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए, तो क्षेत्रीय अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

Exit mobile version