Attack on Iranian Warship: भारतीय महासागर में एक बड़ी सैन्य घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी से दागे गए मार्क-48 टॉरपीडो ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को निशाना बनाया। यह हमला अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुआ। टॉरपीडो लगने के बाद युद्धपोत को भारी नुकसान हुआ और वह समुद्र में डूब गया।
कई नाविकों की गई जान
इस हमले के बाद जहाज पर मौजूद 150 से अधिक नाविकों की मौत हो गई। यह घटना श्रीलंका के तट से करीब 40 मील दूर भारतीय महासागर में हुई बताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से किसी दुश्मन युद्धपोत को डुबोया है। इस वजह से इस घटना को काफी गंभीर माना जा रहा है।
सैन्य अभ्यास से लौट रहा था जहाज
जानकारी के अनुसार, IRIS Dena भारत में हुए MILAN-26 नौसैनिक अभ्यास में शामिल होने के बाद वापस लौट रहा था। ऐसे में यह घटना भारत के आसपास के समुद्री क्षेत्र में हुई है। इस कारण कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अब केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रह गया है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री का बयान
इस घटना के बाद अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि ईरानी जहाज को लगा था कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्र में सुरक्षित है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके बयान के मुताबिक, अमेरिका इस संघर्ष में मजबूत स्थिति में है और अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। हालांकि इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है।
युद्ध के नियम क्या कहते हैं
युद्ध के दौरान भी कुछ अंतरराष्ट्रीय नियम लागू होते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, किसी भी समुद्री संघर्ष के बाद डूबे हुए लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना जरूरी होता है। इसका मतलब यह है कि घायल या समुद्र में फंसे लोगों की मदद करना युद्ध के नियमों के तहत जरूरी माना जाता है। अमेरिकी नौसेना के नियमों में भी यह साफ कहा गया है कि समुद्र में डूबे जहाजों के बचे लोगों के साथ गलत व्यवहार करना युद्ध अपराध माना जा सकता है।
ईरान में बढ़ा गुस्सा
इस घटना के बाद ईरान में भी नाराजगी बढ़ गई है। ईरान ने इस हमले को अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई बताया है। हालांकि अमेरिका ने इस आरोप से इनकार किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव को और बढ़ा दिया है।
भारत के लिए क्यों अहम है मामला
यह घटना भारत के लिए भी चिंता का विषय मानी जा रही है। पहला कारण यह है कि यह हादसा भारत के आसपास के समुद्री इलाके में हुआ है। दूसरा कारण यह है कि भारत के लाखों नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं। इसके अलावा भारत की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसी वजह से भारत ने इस मामले में शांति और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।


