Modi China Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को चीन के तियानजिन शहर पहुंचे, जहां वे रविवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। जापान यात्रा पूरी करने के बाद पीएम मोदी तियानजिन के बिनहाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे, जहां उनका रेड कारपेट पर जोरदार स्वागत हुआ। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सम्मेलन के दौरान वे विभिन्न देशों के नेताओं के साथ गहन चर्चा करेंगे और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा करेंगे।
एससीओ समिट में अहम बैठकें
SCO समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई अहम द्विपक्षीय मुलाकातें होने की संभावना है। खास तौर पर उनकी बैठक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से तय मानी जा रही है। भारत 2017 से SCO का सक्रिय सदस्य है और 2022-23 में संगठन की अध्यक्षता भी कर चुका है।
भारत की भूमिका और प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा SCO के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत ने इस मंच के जरिए नवाचार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में कई पहल की हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि यह यात्रा राष्ट्रीय हितों को मजबूत करने के साथ ही क्षेत्रीय सहयोग और वैश्विक शांति के लिए भी उपयोगी साबित होगी।
द्विपक्षीय संबंधों पर फोकस
चीन पहुंचने के बाद पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बैठक में द्विपक्षीय रिश्तों को सामान्य बनाने पर चर्चा होगी। वहीं, व्लादिमीर पुतिन से उनकी अलग बैठक होगी, जिसमें दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाने पर बात होगी।
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब ट्रंप की व्यापार नीति के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल है। ऐसे माहौल में भारत और चीन की बातचीत को काफी अहम माना जा रहा है।
बीजिंग और भारतीय समुदाय में उत्साह
बीजिंग में पीएम मोदी के स्वागत को लेकर उत्साह का माहौल है। न सिर्फ भारतीय समुदाय, बल्कि स्थानीय चीनी नागरिक और कारोबारी भी इस यात्रा को लेकर बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। इसे भारत-चीन संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
SCO क्या है?
शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 15 जून 2001 को हुई थी। इसके सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं। अफगानिस्तान और मंगोलिया पर्यवेक्षक हैं, जबकि नेपाल, तुर्की, श्रीलंका और सऊदी अरब सहित कई देश संवाद साझेदार हैं।
31 अगस्त से 1 सितंबर तक होने वाली इस बैठक में 20 से ज्यादा देशों के नेता शामिल होंगे। मोदी और शी जिनपिंग पिछली बार अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स समिट के दौरान मिले थे।
पीएम मोदी की यह चीन यात्रा केवल SCO समिट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाना और वैश्विक मंच पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना भी है। जापान और चीन की यात्राएं मिलकर भारत के लिए नए अवसर लेकर आ सकती हैं।