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Nepal Flood: राहत से आगे मुआवजे की मांग क्यों कर रहा नेपाल, क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून

Nepal Flood: बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। इसके बाद 4 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र और सहयोगी संगठनों की ओर से करीब 49.6 मिलियन डॉलर की मानवीय राहत अपील की गई। इस सहायता का उद्देश्य प्रभावित लोगों को भोजन, पानी, दवाएं और अस्थायी आश्रय जैसी तत्काल सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

हालांकि नेपाल की जरूरत केवल आपातकालीन राहत तक सीमित नहीं है। देश का कहना है कि जलवायु बदलाव के कारण बढ़ रही आपदाओं से हुए दीर्घकालिक नुकसान की भरपाई के लिए अलग वित्तीय सहायता भी जरूरी है।

क्या है Loss and Damage?

जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में Loss and Damage का इस्तेमाल उन नुकसान और क्षति के लिए किया जाता है जिन्हें केवल बेहतर तैयारी, मजबूत बुनियादी ढांचे या समय रहते चेतावनी देकर पूरी तरह रोका नहीं जा सकता।

मसलन, किसी आपदा में घर, खेती, रोजगार या बुनियादी ढांचा पूरी तरह प्रभावित हो जाए, तो ऐसे नुकसान से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त की जरूरत पड़ सकती है।

इसी उद्देश्य से Fund for Responding to Loss and Damage बनाया गया है। इसका लक्ष्य जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित विकासशील देशों को सहायता देना है।

क्या यह सीधे मिलने वाला मुआवजा है?

यह समझना जरूरी है कि Loss and Damage Fund किसी देश के लिए ऐसा स्वतः लागू होने वाला मुआवजा सिस्टम नहीं है, जिसमें आपदा के तुरंत बाद पूरे नुकसान की रकम मिल जाए।

देशों को अपनी जरूरत और नुकसान का आकलन प्रस्तुत करना होता है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव पर विचार किया जाता है और मंजूरी मिलने पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

इसलिए नेपाल की मांग को सीधे किसी देश को कानूनी तौर पर दोषी ठहराकर मुआवजा दिलाने की व्यवस्था के रूप में देखना सही नहीं होगा।

नेपाल के लिए क्यों अहम है यह फंड?

नेपाल का कहना है कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उसका योगदान बहुत कम है, लेकिन हिमालयी क्षेत्र होने के कारण वह जलवायु बदलाव के गंभीर प्रभावों का सामना कर रहा है।

बाढ़, भूस्खलन, ग्लेशियरों के पिघलने और ग्लेशियल झीलों के फटने का खतरा देश के लिए बड़ी चुनौती है। 26 अगस्त की आपदा ने इस जोखिम को फिर सामने ला दिया।

हिमालय में क्यों बढ़ रहा है खतरा?

तापमान बढ़ने से ग्लेशियर तेजी से पिघल सकते हैं और पहाड़ों में ग्लेशियल झीलों का विस्तार हो सकता है। ऐसी झील टूटने पर अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे आने की घटना को Glacial Lake Outburst Flood (GLOF) कहा जाता है।

इसमें पानी के साथ मलबा और चट्टानें भी बह सकती हैं, जिससे घरों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंच सकता है। यही वजह है कि नेपाल के लिए केवल आपदा के बाद राहत नहीं, बल्कि लंबे समय की जलवायु वित्तीय सहायता भी महत्वपूर्ण है।

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