Middle East Tension: लेबनान पर हमले से सीजफायर पर खतरा मंडराया, ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ी तनातनी

लेबनान पर इजराइल के हमलों से सीजफायर संकट में आ गया है। ईरान ने कड़ा विरोध जताया है। अमेरिका भी दबाव में नजर आ रहा है और मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की आशंका है।

iran israel conflict lebanon attack: मिडिल ईस्ट में हालात फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। Israel द्वारा Lebanon पर किए गए हमलों के बाद Iran और United States के बीच हुआ सीजफायर खतरे में पड़ गया है। ईरान ने साफ कहा है कि अगर लेबनान पर हमले नहीं रुके, तो वह युद्धविराम समझौते पर आगे बात नहीं करेगा।

अमेरिका का बदला रुख

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अमेरिका थोड़ा नरम रुख अपनाता नजर आया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि बातचीत जारी रहने तक इजराइल लेबनान पर सीमित हमले ही करेगा। लेकिन हालात उस वक्त और गंभीर हो गए, जब इजराइल ने लेबनान की राजधानी Beirut में कुछ ही मिनटों में भारी बमबारी कर दी।

ईरान का कड़ा विरोध

इजराइल की इस कार्रवाई के बाद ईरान ने इसे सीजफायर का खुला उल्लंघन बताया। ईरान का कहना है कि समझौते में लेबनान पर हमला रोकना भी शामिल था। ईरान के विदेश मंत्री ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया और कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो समझौते का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

इजराइल के हमले की वजह

इजराइल के इस कदम के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। पहला, उसने इस कार्रवाई को लेकर Donald Trump को पहले ही भरोसे में ले लिया था। दूसरा कारण Hezbollah को कमजोर करना है। बताया जा रहा है कि हाल के समय में यह संगठन फिर से मजबूत हो रहा था, जिसे इजराइल खतरे के रूप में देख रहा है।

ईरान क्यों कर रहा समर्थन

ईरान लेबनान के समर्थन में खुलकर सामने आ गया है। इसके पीछे कई कारण हैं।
पहला, लेबनान इजराइल का पड़ोसी देश है और वहां Hezbollah का प्रभाव माना जाता है, जो ईरान के करीब है। दूसरा, अगर ईरान इस समय समर्थन नहीं करता, तो उसका प्रभाव कमजोर हो सकता है और उसके सहयोगी संगठन उससे दूरी बना सकते हैं।

रणनीतिक और भौगोलिक वजहें

तीसरा कारण यह है कि अगर लेबनान पर इजराइल का कब्जा मजबूत होता है, तो मिडिल ईस्ट में उसकी ताकत बढ़ सकती है।

चौथा, ईरान को लगता है कि सीजफायर के नाम पर अमेरिका इस संघर्ष से पीछे हटना चाहता है और उसे अकेले इजराइल के सामने छोड़ना चाहता है।

पांचवां कारण भौगोलिक है। लेबनान का जुड़ाव भूमध्य सागर से है, जो रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल मिडिल ईस्ट में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो यह तनाव बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है। दुनिया की नजर अब इस पर टिकी है कि आगे अमेरिका, ईरान और इजराइल क्या कदम उठाते हैं।

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