रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत को स्थायी सदस्य बनाए जाने की मांग का एक बार फिर खुलकर समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया।
रूस ने क्या कहा
लावरोव ने सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों की नई स्थायी सीटों का विरोध किया। उन्होंने खास तौर पर जर्मनी और जापान का नाम लेते हुए कहा कि सुधार के तहत पश्चिमी देशों को अतिरिक्त स्थायी सीट नहीं दी जानी चाहिए। रूस का तर्क है कि परिषद में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए।
भारत की दावेदारी
भारत लंबे समय से UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान G4 समूह के सदस्य हैं और चारों देश सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए सुधार की मांग करते रहे हैं। सितंबर 2026 में भी चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने सुरक्षा परिषद सुधार को लेकर संयुक्त बैठक की थी।
भारत अब तक सुरक्षा परिषद का 8 बार अस्थायी सदस्य रह चुका है। हालांकि अस्थायी सदस्य के तौर पर दो साल का कार्यकाल मिलता है, लेकिन स्थायी सदस्यों की तरह वीटो का अधिकार नहीं होता।
पांच देश स्थायी
फिलहाल UNSC में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें 5 स्थायी सदस्य—अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस हैं। इन पांचों के पास वीटो पावर है। बाकी 10 सदस्य दो साल के लिए चुने जाते हैं और उनके पास वीटो का अधिकार नहीं होता।
बदलाव आसान नहीं
सुरक्षा परिषद की संरचना बदलने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में दो-तिहाई बहुमत के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के दो-तिहाई सदस्य देशों की मंजूरी जरूरी है। इसमें मौजूदा पांचों स्थायी सदस्यों की मंजूरी भी आवश्यक होती है। इसलिए किसी नए देश को स्थायी सदस्य बनाने की प्रक्रिया राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर काफी जटिल है।
भारत को मिला समर्थन
रूस के अलावा इस महासभा सत्र में मॉरीशस और पुर्तगाल ने भी भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया है। पुर्तगाल ने सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने की जरूरत बताई, जबकि मॉरीशस ने भारत की उम्मीदवारी के समर्थन को दोहराया।

