Russia Ukraine Peace Talks: रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग के बीच शांति की कोशिशों को लेकर एक अहम संकेत सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि हाल की बैठक में 314 युद्धबंदियों की अदला-बदली पर सहमति बन गई है। इसे पिछले पांच महीनों में सबसे बड़ी प्रगति माना जा रहा है। बातचीत में युद्ध विराम, सुरक्षा की गारंटी और बड़े रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा हो रही है। हालांकि, इन प्रयासों के बीच जमीन पर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
अमेरिका ने दिया अपडेट, धैर्य की अपील
इस पूरी प्रक्रिया पर अमेरिका भी नजर बनाए हुए है। अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने शांति वार्ता को लेकर अपडेट साझा करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की बात कही है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने साफ कहा है कि वे रूस को किसी भी तरह का “इनाम” देने के पक्ष में नहीं हैं। दिलचस्प बात यह है कि बातचीत के साथ-साथ दोनों देशों की ओर से ड्रोन हमले भी जारी हैं, जिससे शांति की राह और मुश्किल नजर आती है।
यूएई में तय हो सकती हैं ये बड़ी शर्तें
माना जा रहा है कि United Arab Emirates में चल रही बातचीत के दौरान कुछ अहम बिंदुओं पर सहमति बन सकती है। सबसे पहला और जरूरी कदम 314 युद्धबंदियों की अदला-बदली है, जिसकी पुष्टि पहले ही हो चुकी है। इसे भरोसा बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
दूसरा बड़ा मुद्दा जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र का है। चर्चा है कि Zaporizhzhia Nuclear Power Plant को एक न्यूट्रल जोन घोषित किया जा सकता है। रूस वहां से अपनी सैन्य मौजूदगी घटा सकता है और अंतरराष्ट्रीय एजेंसी International Atomic Energy Agency की निगरानी में इसे यूक्रेन की बिजली ग्रिड से जोड़ा जा सकता है।
नाटो और सुरक्षा गारंटी का सवाल
रूस की सबसे अहम शर्त यह है कि यूक्रेन भविष्य में NATO का सदस्य नहीं बनेगा। इसके बदले अमेरिका और उसके सहयोगी देश यूक्रेन को अलग-अलग स्तर पर सुरक्षा गारंटी देने पर विचार कर सकते हैं, ताकि वह अपनी रक्षा खुद कर सके।
मौजूदा हालात पर रोक और आगे की राह
एक और प्रस्ताव यह है कि जहां दोनों देशों की सेनाएं अभी खड़ी हैं, वहीं हालात को “फ्रीज” कर दिया जाए। यूक्रेन पूरे डोनबास क्षेत्र को वापस चाहता है, लेकिन समझौते के तहत फिलहाल लड़ाई रोकने पर सहमति बन सकती है। इसके साथ ही रूस चाहता है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध धीरे-धीरे हटाए जाएं। बदले में वह यूक्रेन के पुनर्निर्माण या ऊर्जा आपूर्ति में रियायत देने पर राजी हो सकता है।
बताया जा रहा है कि Abu Dhabi में हो रही यह बातचीत आसान नहीं है, लेकिन अगर ये शर्तें मान ली जाती हैं, तो जंग थमने की दिशा में यह एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
