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No corruption: सिंगापुर में भ्रष्टाचार क्यों है इतना कम?, सरकारी कर्मचारियों और नेताओं की मोटी सैलरी या और कुछ

सिंगापुर में सरकारी कर्मचारियों और नेताओं को भारत की तुलना में काफी ज्यादा वेतन मिलता है। सरकार का तर्क है कि बेहतर वेतन से आर्थिक दबाव घटता है, लेकिन सख्त कानून और सजा का डर भी ईमानदारी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

सैलरी का अलग मॉडल

कल्पना कीजिए कि किसी सरकारी कर्मचारी को हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपये वेतन मिले और उसके बच्चों की पढ़ाई व परिवार के इलाज जैसी सुविधाओं का खर्च भी काफी हद तक व्यवस्थित हो। क्या इससे रिश्वत लेने की जरूरत कम हो सकती है? सिंगापुर का सरकारी मॉडल इसी सोच पर काफी हद तक आधारित है। वहां माना जाता है कि सरकारी कर्मचारियों को इतना अच्छा वेतन मिलना चाहिए कि उन्हें आर्थिक असुरक्षा महसूस न हो और वे ईमानदारी से जनता की सेवा करें। यह व्यवस्था केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सांसदों, मंत्रियों और प्रधानमंत्री तक के वेतन में भी दिखाई देती है।

प्रधानमंत्री की कमाई

सिंगापुर में प्रधानमंत्री की सालाना सैलरी बढ़ाकर 3.6 मिलियन सिंगापुर डॉलर करने की मंजूरी दी गई है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 27 करोड़ रुपये सालाना बैठती है। इस बढ़ोतरी के बाद सिंगापुर के प्रधानमंत्री दुनिया के सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले शासनाध्यक्षों में शीर्ष पर हैं। तुलना करें तो भारत में राष्ट्रपति का मासिक वेतन 5 लाख रुपये और प्रधानमंत्री का मासिक वेतन करीब 2.8 लाख रुपये बताया जाता है। दोनों देशों की वेतन व्यवस्था में बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है। सिंगापुर सरकार का मानना है कि शीर्ष राजनीतिक पदों पर योग्य लोगों को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी वेतन जरूरी है।

कर्मचारियों की सैलरी

सिंगापुर में निचले स्तर के सरकारी कर्मचारी को करीब 2,000 सिंगापुर डॉलर मासिक वेतन मिलने की बात सामने आती है। भारतीय मुद्रा में यह लगभग 1.5 लाख रुपये के आसपास है। वहीं भारत में सातवें वेतन आयोग के तहत आईएएस अधिकारी की बेसिक सैलरी 56,100 रुपये से शुरू होती है। भत्ते और अन्य सुविधाएं जोड़ने पर यह रकम बढ़ती है। सिंगापुर में आम नौकरीपेशा व्यक्ति की आय भी काफी अधिक है। 2025 में वहां मध्य स्तर के कर्मचारी की मासिक आय 5,775 सिंगापुर डॉलर यानी करीब 4 लाख रुपये थी। इसका मतलब है कि आधे कर्मचारियों की आय इससे कम और आधे की इससे ज्यादा थी।

मंत्री सांसद भी मालामाल

सिंगापुर में निचले स्तर के मंत्री का बेंचमार्क सालाना वेतन 1.8 मिलियन सिंगापुर डॉलर तय किया गया है, जो करीब 13.5 करोड़ रुपये के बराबर है। हालांकि पूरी रकम तुरंत नहीं मिलती और प्रदर्शन व जिम्मेदारी के आधार पर भुगतान का ढांचा अलग रहता है। वहीं सांसदों के मासिक भत्ते को 13,750 से बढ़ाकर 18,500 सिंगापुर डॉलर करने की सिफारिश स्वीकार की गई है। सरकार की सोच है कि जब निजी क्षेत्र में प्रतिभाशाली लोग बहुत ज्यादा कमाई कर सकते हैं, तो राजनीति में आने वाले योग्य लोगों को भी प्रतिस्पर्धी वेतन मिलना चाहिए। इससे राजनीति को आर्थिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आकर्षण कम किया जा सकता है।

सिर्फ पैसा काफी नहीं

सिंगापुर की कहानी का सबसे अहम हिस्सा यही है कि वहां भ्रष्टाचार केवल ज्यादा सैलरी की वजह से कम नहीं है। देश में कड़े कानून, मजबूत संस्थाएं, जांच की प्रभावी व्यवस्था और दोषी पाए जाने पर सजा का डर भी मौजूद है। 2024 में पूर्व परिवहन मंत्री एस. ईश्वरन को न्याय में बाधा डालने और महंगे उपहार लेने के मामले में जेल की सजा हुई थी। यानी ऊंची आय के बावजूद भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। सिंगापुर का मॉडल मूल रूप से यह कहता है कि सरकारी कर्मचारियों को पर्याप्त वेतन दो ताकि रिश्वत की आर्थिक जरूरत कम हो, लेकिन अगर कोई भ्रष्टाचार करता है तो उसे सख्त कार्रवाई से बचने मत दो। यही वेतन और जवाबदेही का संतुलन उसकी व्यवस्था को मजबूत बनाता है।

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