Rising Tensions in the Middle East: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद पूरा मिडिल ईस्ट तनाव में है। जवाबी कार्रवाई में ईरान खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है, जबकि अमेरिका और इजरायल भी तेहरान पर दबाव बनाए हुए हैं। सोमवार को ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों में कई लोगों की मौत की खबर आई, जिसके बाद माहौल और गंभीर हो गया।
स्थिति इतनी खराब हो गई कि अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर लौटने की सलाह दे दी।
अमेरिकी नागरिकों के लिए एडवाइजरी
अमेरिकी विदेश विभाग की सहायक मंत्री Mora Namdar ने बयान जारी कर कहा कि सुरक्षा खतरे को देखते हुए अमेरिकी नागरिक उपलब्ध साधनों से जल्द से जल्द इन देशों को छोड़ दें।
यह चेतावनी बहरीन, मिस्र, ईरान, इराक, इजराइल, वेस्ट बैंक और गाजा, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और यमन के लिए लागू की गई है। इससे पहले भी अमेरिकी विदेश विभाग इन इलाकों के लिए यात्रा सलाह अपडेट कर चुका था और लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने को कहा था।
दूतावासों में अलर्ट
जॉर्डन की राजधानी Amman स्थित अमेरिकी दूतावास ने सुरक्षा कारणों से अपने कुछ कर्मचारियों को परिसर से हटा लिया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि हालात पर नजर रखने और समन्वय के लिए इमरजेंसी टास्क फोर्स सक्रिय कर दी गई है। सऊदी अरब में भी अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले की खबर सामने आई है, जिससे वहां आग लग गई। इसके बाद सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है।
ट्रंप की आगे की रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने वाइट हाउस में कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई चार से पांच हफ्तों तक चल सकती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जरूरत पड़ी तो यह अभियान और लंबा भी हो सकता है।
ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के मारे जाने की खबरों और स्पष्ट राजनीतिक योजना की कमी ने हालात को और उलझा दिया है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है।
क्या यह लंबी जंग बनेगी?
अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा कि यह इराक जैसा अंतहीन युद्ध नहीं होगा। उनके अनुसार, अमेरिका जीत के उद्देश्य से लड़ रहा है और समय या संसाधन बर्बाद नहीं करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह औपचारिक रूप से सत्ता परिवर्तन का युद्ध नहीं है, लेकिन हालात में बदलाव जरूर आया है।
अब आगे क्या हो सकता हैं?
फिलहाल मिडिल ईस्ट में अनिश्चितता बनी हुई है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच आम लोगों में डर का माहौल है। कई देशों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर पड़ रहा है। स्थिति कब सामान्य होगी, यह कहना मुश्किल है। लेकिन इतना साफ है कि यह टकराव सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर रहा है।

