US Iran Conflict on Strait of Hormuz, मध्य पूर्व में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दो मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि एक जहाज को कब्जे में लिया गया, जबकि दूसरे को हमले में नुकसान पहुंचा। इस घटना के बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक पर सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
अमेरिका की चुनौती
घटना के समय अमेरिकी नौसेना क्षेत्र में मौजूद थी, लेकिन IRGC की कार्रवाई को तुरंत रोक नहीं सकी। इससे अमेरिका की समुद्री सुरक्षा रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। हाल के महीनों में ईरान लगातार होर्मुज क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और दबदबा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यह इलाका वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
इजरायल की नजर ट्रंप पर
इस बीच इजरायल के रक्षा मंत्री ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका से मंजूरी मिलती है तो ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया जा सकता है। उनका कहना है कि इजरायली सेना पूरी तरह तैयार है और अब केवल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम सहमति का इंतजार है। माना जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल संयुक्त रणनीति पर लगातार चर्चा कर रहे हैं।
ट्रंप का सख्त संदेश
डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कूटनीतिक बातचीत विफल रहती है या अमेरिकी हितों पर हमला जारी रहता है तो अमेरिका और अधिक कठोर सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और यदि ईरान तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाता है तो समाधान की संभावना बनी रह सकती है।
आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर ट्रंप के अगले फैसले और ईरान की अगली रणनीति पर टिकी हुई है, क्योंकि दोनों पक्षों के एक-एक कदम से क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है।
