सीजफायर के बाद भी अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा , ट्रंप की चेतावनी, होर्मुज में टोल जारी, तेल सप्लाई पर बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बाद भी तनाव बना है। ट्रंप ने ईरान को जहाजों से टोल न लेने की चेतावनी दी। होर्मुज जलडमरूमध्य में सीमित जहाजों की आवाजाही से तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

US Iran tension Hormuz Strait oil flow

US Iran Tension After Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच भले ही सीजफायर की घोषणा हो चुकी हो, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय अब नए मुद्दों को लेकर बढ़ता दिख रहा है।

ट्रंप ने दी सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर के 24 घंटे के भीतर ही ईरान को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से किसी भी तरह का टोल न वसूले।

तेल सप्लाई पर दिया बयान

ट्रंप ने यह भी कहा कि बहुत जल्द दुनिया तेल का बहाव फिर से सामान्य होते हुए देखेगी। उन्होंने कहा कि यह काम ईरान के साथ हो या उसके बिना, अमेरिका इसे सुनिश्चित करेगा।

ईरान ने लगाई थी शर्तें

दरअसल, ईरान ने सीजफायर के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति दी है। लेकिन उसने शुरुआत में रोजाना सिर्फ 15 जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है। यह नियम फिलहाल संघर्ष-विराम के दौरान लागू रहेगा।

सोशल मीडिया पर बयान

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि उन्हें खबर मिल रही है कि ईरान जहाजों से फीस वसूल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हो रहा है, तो इसे तुरंत बंद करना चाहिए।

क्रिप्टो में टोल की चर्चा

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान जहाजों से टोल क्रिप्टोकरेंसी में लेने की बात कर रहा है। हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे विवाद और बढ़ गया है।

जहाजों की आवाजाही सीमित

जानकारी के मुताबिक, सीजफायर लागू होने के बाद अब तक बहुत कम जहाज इस रास्ते से गुजर पाए हैं। एक दिन में अधिकतम 15 जहाजों को ही अनुमति दी जा रही है और इसके लिए भी ईरान की मंजूरी जरूरी है।

दुनिया के लिए अहम रास्ता

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से होकर दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में स्थायी शांति और तेल सप्लाई की स्थिति काफी हद तक ईरान के फैसलों पर निर्भर करेगी। अगर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ सकता है।

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