US Withdraws from Dozens of Global Organizations:अमेरिका की विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों से खुद को अलग करने जा रहा है। राष्ट्रपति कार्यालय का कहना है कि ये संस्थाएं अब अमेरिकी हितों के अनुरूप काम नहीं कर रही हैं और इनमें अमेरिकी करदाताओं का पैसा बेवजह खर्च हो रहा है।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी राष्ट्रपति ज्ञापन में साफ कहा गया है कि इस फैसले के तहत अमेरिका कुल 35 गैर-यूएन (Non-UN) अंतरराष्ट्रीय संगठनों और 31 संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े निकायों से बाहर निकलेगा। इस कदम को ट्रंप प्रशासन की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
गैर-यूएन संगठनों से भी अमेरिका की दूरी
जिन गैर-यूएन संगठनों से अमेरिका हटने जा रहा है, उनमें भारत और फ्रांस की अगुवाई वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) भी शामिल है। यह संगठन साल 2015 में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के मकसद से शुरू किया गया था। इसके अलावा पर्यावरण से जुड़े बड़े संस्थानों जैसे इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) और इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) से भी अमेरिका अलग होने जा रहा है।
अन्य प्रमुख संगठनों में इंटरनेशनल एनर्जी फोरम, इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA), पार्टनरशिप फॉर अटलांटिक कोऑपरेशन और ग्लोबल काउंटर टेररिज्म फोरम जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी संस्थाओं में अमेरिका अब आगे भागीदारी नहीं करेगा।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अहम निकाय भी सूची में
राष्ट्रपति ज्ञापन के अनुसार, अमेरिका कई महत्वपूर्ण संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं से भी दूरी बना रहा है। इनमें डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स, इंटरनेशनल लॉ कमीशन, इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर, पीसबिल्डिंग कमीशन, यूएन एनर्जी, यूएन पॉपुलेशन फंड (UNFPA) और यूएन वॉटर जैसे अहम निकाय शामिल हैं।
ट्रंप ने सभी कार्यकारी विभागों और एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे इन संगठनों से अमेरिका की वापसी की प्रक्रिया को जल्द से जल्द लागू करें। जहां कानून इजाजत देता है, वहां अमेरिकी भागीदारी और फंडिंग पूरी तरह खत्म की जाएगी।
भारत पर क्या पड़ेगा असर
इंटरनेशनल सोलर अलायंस भारत की एक अहम और महत्वाकांक्षी पहल है, जिसमें 100 से ज्यादा देश शामिल हैं। अमेरिका के बाहर होने से वैश्विक सौर ऊर्जा सहयोग पर असर पड़ सकता है। हालांकि ISA के महानिदेशक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। जानकारों का मानना है कि यह फैसला जलवायु परिवर्तन से निपटने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को कमजोर कर सकता है।
रिपोर्ट और कैबिनेट चर्चा के बाद फैसला
व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह निर्णय अमेरिकी विदेश मंत्री की रिपोर्ट और कैबिनेट के साथ विस्तृत चर्चा के बाद लिया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि इन संगठनों में अमेरिका की मौजूदगी और आर्थिक मदद देश के हित में नहीं है।
पहले भी कई संस्थाओं से अलग हो चुका है अमेरिका
यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका ने इस तरह का कदम उठाया हो। ट्रंप प्रशासन पहले ही कई बहुपक्षीय संगठनों से खुद को अलग कर चुका है। जनवरी 2025 में अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से यह कहते हुए दूरी बनाई थी कि कोविड-19 के दौरान संगठन की भूमिका संतोषजनक नहीं रही।
इसके बाद जुलाई 2025 में अमेरिका ने यूनेस्को (UNESCO) से भी बाहर निकलने का फैसला किया था। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये संस्थाएं ग्लोबल एजेंडा को बढ़ावा देती हैं, जो अमेरिकी संप्रभुता और आर्थिक हितों के खिलाफ है।
