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Xi Jinping ने तियानमेन प्रदर्शन कुचलने के 36 साल पुराने फैसले को सही ठहराया, क्या कम्युनिस्ट पार्टी का निर्णय सही था

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 1989 के तियानमेन स्क्वायर प्रदर्शन को कुचलने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी के फैसले का बचाव किया है। उनके इस रुख से 36 साल पुरानी उस घटना की चर्चा फिर तेज हो गई है, जिसमें चीनी सेना टैंकों के साथ बीजिंग की सड़कों पर उतरी थी। तियानमेन प्रदर्शन चीन के इतिहास की सबसे संवेदनशील और विवादित घटनाओं में शामिल है। उस समय बड़ी संख्या में छात्र और आम नागरिक राजनीतिक सुधार, भ्रष्टाचार पर रोक और ज्यादा स्वतंत्रता की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे।

तियानमेन पर फैसला

1989 में कई हफ्तों तक चले प्रदर्शन के बाद चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया था। 3 और 4 जून की रात सेना ने बीजिंग में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अभियान शुरू किया। सैनिकों के साथ टैंक भी सड़कों पर उतारे गए। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों और आम नागरिकों की मौत हुई। हालांकि, मृतकों की वास्तविक संख्या आज भी स्पष्ट नहीं है। चीन की सरकार ने इस घटना को लंबे समय से राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया जरूरी कदम बताया है।

प्रदर्शन की शुरुआत

तियानमेन स्क्वायर पर प्रदर्शन की शुरुआत मुख्य रूप से छात्रों ने की थी। धीरे-धीरे इसमें आम नागरिक भी शामिल होने लगे। प्रदर्शनकारी राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बदलाव, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और अभिव्यक्ति की ज्यादा आजादी की मांग कर रहे थे। आंदोलन लगातार बढ़ता गया और बीजिंग के साथ दूसरे इलाकों में भी इसका असर दिखाई देने लगा। कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व ने इसे देश की राजनीतिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती माना और आखिरकार सेना की मदद से प्रदर्शन को खत्म करने का फैसला किया।

सेना की कार्रवाई

सैन्य कार्रवाई के दौरान बीजिंग की सड़कों पर टैंक और हथियारबंद सैनिक दिखाई दिए। सेना ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग किया। इस कार्रवाई की तस्वीरें दुनिया भर में चर्चा का विषय बनीं। इनमें एक व्यक्ति का टैंकों के सामने अकेले खड़ा होना सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल रहा। इस घटना ने चीन की सरकार की मानवाधिकार नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े किए। इसके बाद भी चीन ने कार्रवाई को गलत मानने के बजाय इसे देश में व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत के तौर पर पेश किया।

चीन में सेंसरशिप

तियानमेन घटना के बाद चीन में इस विषय पर कड़ा नियंत्रण रखा गया। सरकारी मीडिया में इसकी स्वतंत्र चर्चा सीमित रही और इंटरनेट पर इससे जुड़ी कई जानकारियों को सेंसर किया जाता है। हर साल 4 जून के आसपास चीन में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी जाती है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सरकार ने घटना की सार्वजनिक स्मृति को दबाने की लगातार कोशिश की है। इसी वजह से चीन की नई पीढ़ी के कई लोगों को इस घटना की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती।

शी का रुख कायम

शी जिनपिंग के बयान से साफ है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी तियानमेन कार्रवाई को लेकर अपने पुराने रुख में बदलाव नहीं कर रही है। शी के नेतृत्व में राजनीतिक स्थिरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और पार्टी के नियंत्रण को लगातार प्राथमिकता दी गई है। ऐसे में 1989 की कार्रवाई को सही ठहराना पार्टी की मौजूदा सोच से भी जुड़ा माना जा रहा है। दूसरी ओर, चीन के बाहर इस घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा जाता है।

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