कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी कार हादसे में गिरफ्तार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को जिला अदालत से जमानत मिल गई है। कोर्ट ने उसे 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। जमानत मिलने के बाद परिवार और वकीलों ने राहत की सांस ली।
पुलिस की मांग हुई खारिज
जमानत पर सुनवाई के दौरान पुलिस ने शिवम मिश्रा की 14 दिन की रिमांड मांगी थी, ताकि उससे पूछताछ की जा सके। हालांकि कोर्ट ने पुलिस की इस मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट के फैसले के बाद शिवम के वकील मृत्युंजय सिंह ने मीडिया को पूरी जानकारी दी।
वकील ने दी जानकारी
वकील मृत्युंजय सिंह ने बताया कि लैंबॉर्गिनी हादसे के मामले में शिवम मिश्रा को जमानत मिल चुकी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की रिमांड याचिका निरस्त कर दी। उन्होंने कहा कि 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मिली है, जो शिवम के लिए बड़ी राहत है।
चार दिन बाद हुई गिरफ्तारी
बता दें कि हादसे के चार दिन बाद पुलिस ने शिवम मिश्रा को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसका मेडिकल कराया गया और फिर उसे कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट में सुनवाई के बाद अब उसे जमानत मिल गई है, जिससे उसे फिलहाल राहत मिल गई है।
8 फरवरी को हुआ हादसा
यह पूरा मामला 8 फरवरी का है, जब VIP रोड पर तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी कार ने एक बाइक को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में मोहम्मद तौफीक घायल हो गए थे। घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें कार से कुछ बाउंसर शिवम मिश्रा को ड्राइविंग सीट से बाहर निकालते नजर आए थे।
शुरुआत में पुलिस पर सवाल
हादसे के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे थे। घायल मोहम्मद तौफीक की शिकायत पर ग्वालटोली थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज तो किया, लेकिन शुरुआत में मामला अज्ञात के खिलाफ लिखा गया। इससे लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।
वीडियो वायरल होने से दबाव
जब हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और मामला मीडिया तक पहुंचा, तब पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा। इसके बाद पुलिस ने जल्दबाजी में केस में शिवम मिश्रा का नाम जोड़ा। कानपुर के पुलिस कमिश्नर सुधीर पाल ने बताया कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था।
दिल्ली अस्पताल में भर्ती
हादसे के बाद शिवम की तबीयत खराब हो गई थी। जानकारी मिली कि वह इलाज के लिए दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती था। कानपुर के बजाय दिल्ली में भर्ती होने को लेकर भी लोगों के बीच कई सवाल उठे।
ड्राइवर ने कोर्ट में क्या कहा
11 फरवरी को शिवम के पिता केके मिश्रा थाने पहुंचे और दावा किया कि कार उनका बेटा नहीं, बल्कि ड्राइवर मोहन चला रहा था। उसी दिन ड्राइवर मोहन ने कोर्ट में सरेंडर किया। उसने बताया कि शिवम को दौरा पड़ा था, जिससे घबराकर हादसा हो गया। बाद में बाउंसर ने शिवम को कार से बाहर निकाला।
