Kanpur Ring Road: क्या नए साल में चालू हो जायेगा मंधना से सचेंडी वाला पहला पैकेज, 93 किमी रिंग रोड से घटेगा जाम

कानपुर की 93 किलोमीटर लंबी रिंग रोड परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। पहले पैकेज का 65 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और नए साल में वाहनों का संचालन शुरू होने की उम्मीद है।

Kanpur ring road project: कानपुर शहर को जाम से राहत देने और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए निर्माणाधीन रिंग रोड परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने करीब 93 किलोमीटर लंबी रिंग रोड के पहले चरण यानी मंधना से सचेंडी वाले पैकेज-1 को नए साल में वाहनों के लिए खोलने का लक्ष्य रखा है। इस पैकेज का करीब 65 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। वहीं, सचेंडी से साढ़ वाले दूसरे हिस्से का करीब 42 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी दी गई है।

जीटी रोड पर घटेगा दबाव

रिंग रोड के निर्माण से कानपुर के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। परियोजना का संबंधित हिस्सा पूरा होने के बाद अलीगढ़-कानपुर हाईवे से चकेरी-इटावा हाईवे तक सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सकेगी। इससे जीटी रोड पर गुजरने वाले वाहनों की संख्या कम हो सकती है और शहर के भीतर जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। रिंग रोड का मुख्य उद्देश्य भारी वाहनों को शहर के अंदर आने से रोककर उन्हें बाहरी मार्ग से आगे भेजना है।

2028 तक पूरा होगा काम

करीब 93 किलोमीटर लंबी इस रिंग रोड परियोजना पर लगभग 4,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसे कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव जिलों को जोड़ते हुए चार पैकेज में पूरा किया जा रहा है। NHAI का लक्ष्य वर्ष 2028 तक पूरी रिंग रोड का निर्माण पूरा करने का है। परियोजना पूरी होने के बाद कानपुर-इटावा, जीटी रोड, झांसी, कानपुर-सागर, प्रयागराज और लखनऊ की ओर जाने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग रिंग रोड से जुड़ जाएंगे। इससे शहर में प्रवेश किए बिना वाहनों की आवाजाही आसान हो सकेगी।

औद्योगिक कनेक्टिविटी मजबूत

रिंग रोड को कई राज्य मार्गों से भी जोड़ने की योजना है। इसके चलते शहर के अलग-अलग हिस्सों और औद्योगिक क्षेत्रों तक माल की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। NHAI अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना शुरू होने के बाद न केवल कानपुर की यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि भारी वाहनों और मालवाहक ट्रकों को वैकल्पिक मार्ग भी मिलेगा। इससे औद्योगिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स को गति मिलने के साथ क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिल सकता है।

13 जगहों पर टोल

रिंग रोड परियोजना की एक प्रमुख विशेषता 13 प्रस्तावित टोल प्लाजा हैं। इन्हें उन प्रमुख स्थानों पर बनाए जाने की योजना है, जहां से वाहन रिंग रोड में प्रवेश या बाहर निकलेंगे। टोल की व्यवस्था दूरी आधारित होने की संभावना है। यानी वाहन जिस स्थान से रिंग रोड पर प्रवेश करेगा और जितनी दूरी तक यात्रा करेगा, उसी के अनुसार टोल शुल्क निर्धारित किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम टोल दर और दूरी के आधार पर शुल्क का निर्धारण पूरी परियोजना पूरी होने के बाद किया जाएगा। रिंग रोड पर NHAI का वार्षिक फास्टैग पास भी मान्य रहेगा।

पैकेजों की स्थिति

परियोजना के पैकेज-1 में मंधना से सचेंडी तक करीब 23 किलोमीटर हिस्से में सड़क समतलीकरण और पुल-पुलिया निर्माण का काम चल रहा है। पैकेज-4 में सचेंडी से रमईपुर तक करीब 24.5 किलोमीटर हिस्से में जमीन का समतलीकरण पूरा होने की जानकारी है। पैकेज-3 में रमईपुर से रूमा होते हुए गंगा पुल के जरिए उन्नाव के आटा तक करीब 19.23 किलोमीटर मार्ग शामिल है, जिसका ठेका दिया जा चुका है। यह हिस्सा डिफेंस कॉरिडोर, चकेरी एयरपोर्ट और प्रयागराज हाईवे से कनेक्टिविटी देगा। वहीं, पैकेज-2 में आटा से मंधना तक का हिस्सा शामिल है, जिसमें गंगा नदी पर करीब 3.2 किलोमीटर लंबा पुल भी प्रस्तावित है।

पहला पैकेज अहम

NHAI के परियोजना निदेशक पंकज यादव के अनुसार, रिंग रोड के पैकेज-1 का करीब 65 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और नए साल में इसे वाहनों के आवागमन के लिए खोला जा सकता है। इसके शुरू होने के बाद अलीगढ़-कानपुर हाईवे और चकेरी-इटावा हाईवे के बीच सीधी कनेक्टिविटी मिलने से जीटी रोड पर वाहनों का दबाव कम होने की संभावना है। परियोजना के पूरी तरह तैयार होने के बाद कानपुर को जाम से राहत मिलने के साथ शहर के आसपास परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

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