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Kanpur RTO Drama: किसके आने की अफवाह से मची हलचल, घंटों से भटक रहे लोगों के काम अचानक होने लगे फटाफट

कानपुर के संभागीय परिवहन कार्यालय यानी आरटीओ में एक आवेदक को वाहन ट्रांसफर कराने के लिए काफी देर तक चक्कर काटना पड़ा। राजस्थान से आया यह आवेदक अपने वाहन का ट्रांसफर कराने के लिए कार्यालय पहुंचा था।

बताया जा रहा है कि उसे महिला बाबू प्रीति तोमर के पटल पर काम कराना था। आरोप है कि जरूरी प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर उसे काफी देर तक इधर-उधर भेजा जाता रहा। वह अलग-अलग जगह जाकर अपनी फाइल के बारे में पूछता रहा, लेकिन उसका काम आगे नहीं बढ़ सका।

पुलिस की खबर से बदल गया माहौल

लगातार परेशान होने के बाद आवेदक ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दे दी। इसके बाद आरटीओ कार्यालय में पुलिस के पहुंचने की खबर फैल गई। पुलिस आने की सूचना मिलते ही कार्यालय में अचानक हलचल बढ़ गई।

बताया जा रहा है कि संबंधित पटल पर फाइलों का काम तेजी से होने लगा। जिस आवेदक को काफी समय से वाहन ट्रांसफर के लिए परेशान होना पड़ रहा था, उसकी फाइल पर भी तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी गई।

मामले की जानकारी आरटीओ प्रशासन राकेंद्र कुमार को हुई तो उन्होंने संबंधित बाबू को आवेदक की फाइल का निस्तारण करने के निर्देश दिए।

बाबू को अधिकारियों ने लगाई फटकार

मामला सामने आने के बाद आरटीओ प्रशासन राकेंद्र कुमार ने संबंधित महिला बाबू को बुलाया। उन्होंने आवेदक के काम में देरी और उसे बार-बार परेशान किए जाने को लेकर नाराजगी जताई।

आरटीओ प्रशासन के मुताबिक, संबंधित बाबू के खिलाफ पहले भी कई लोग शिकायत लेकर उनके पास आ चुके हैं। ऐसे में इस मामले को भी गंभीरता से लिया गया और बाबू को काम में लापरवाही न बरतने के लिए फटकार लगाई गई।

कार्यालय में पुलिस आई ही नहीं

इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात यह सामने आई कि जिस पुलिस के आने की खबर से आरटीओ कार्यालय में अफरा-तफरी मची, वह खबर सही नहीं थी।

आरटीओ प्रशासन राकेंद्र कुमार ने साफ किया कि पुलिस के कार्यालय पहुंचने की सूचना गलत थी। यानी पुलिस वास्तव में आरटीओ कार्यालय आई ही नहीं थी।

पुलिस के आने की सिर्फ खबर फैलने के बाद ही कार्यालय में काम तेज होने की चर्चा शुरू हो गई। वहीं, मामले में आवेदक की शिकायत और संबंधित बाबू के खिलाफ सामने आई शिकायतों को लेकर आरटीओ प्रशासन ने कार्रवाई की बात कही है।

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