कर्नाटक में कांग्रेस की एकता! सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार ने मिलकर कहा ‘कोई मतभेद नहीं’

कर्नाटक में CM पद को लेकर चल रही राजनीतिक अटकलों के बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया तथा पार्टी के कद्दावर नेता डी. के. शिवकुमार ने शनिवार को जनता और मीडिया के सामने अपनी एकता का संदेश दिया। इस एकता प्रदर्शन ने प्रदेश की राजनीति में सियासी हलचल के बीच स्थिरता का संकेत दिया। शनिवार सुबह, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के निवास “कावेरी” में एक नाश्ते की मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया को एक साथ संबोधित कर यह स्पष्ट कर दिया कि उनके बीच कोई दरार नहीं है। उन्होंने कहा कि “कोई भ्रम नहीं है” और सरकार एवं पार्टी में एकता बनी हुई है।

सत्ता संघर्ष के बीच कांग्रेस ने दिखाई एकजुटता, सिद्धारमैया-शिवकुमार ने तय किया विकास पर ध्यानKarnataka : कर्नाटक में CM पद को लेकर चल रही राजनीतिक अटकलों के बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया तथा पार्टी के कद्दावर नेता डी. के. शिवकुमार ने शनिवार को जनता और मीडिया के सामने अपनी एकता का संदेश दिया। इस एकता प्रदर्शन ने प्रदेश की राजनीति में सियासी हलचल के बीच स्थिरता का संकेत दिया। शनिवार सुबह, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के निवास “कावेरी” में एक नाश्ते की मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया को एक साथ संबोधित कर यह स्पष्ट कर दिया कि उनके बीच कोई दरार नहीं है। उन्होंने कहा कि “कोई भ्रम नहीं है” और सरकार एवं पार्टी में एकता बनी हुई है।

दोनों नेताओं ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास पर नाश्ते पर बैठक की और एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिससे 8 दिसंबर से बेलगावी में होने वाले विधानमंडल सत्र से पहले एक अस्थायी संघर्ष विराम का संकेत मिला। शिवकुमार ने कहा, “हमने इस पर चर्चा करने के लिए बैठक की। हमारा लक्ष्य नगर निगम, ग्राम पंचायत और 2028 के चुनाव में जीत हासिल करना है।

पावर टकराव के बीच आया यह कदम

यह मुलाकात उस समय हुई है, जब कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी अटकलें तेज थीं। पूर्व में दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया पर एक दूसरे के खिलाफ बयानबाज़ी की थी, जिससे दुर्बलता का माहौल बन गया था। लेकिन इस मीटिंग में उन्होंने मिलकर कहा कि वे आगे 2028 विधानसभा चुनावों और पार्टी के एजेंडे पर काम करेंगे। दूनों नेताओं ने मिलकर कहा कि विपक्ष BJP व JD(S) द्वारा फैलाए जा रहे अटकलों और अफवाहों का जवाब अब एकता के साथ देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का ध्यान अब विकास, योजनाओं और अगले चुनाव पर ही रहेगा।

इस एकता दिखावे को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा दोनों नेताओं को बुलाकर बातचीत के लिए कहा जाने के फौरन बाद देखा जा रहा है। कई विश्लेषक इसे कांग्रेस के भीतर पनप रही दरारों को रोकने की कोशिश मान रहे हैं। अब यह देखना होगा कि क्या यह एकता सिर्फ दिखावा है या सचमुच जारी रहने वाली है। अगले कुछ दिनों में नेताओं के व्यवहार, विधानसभा में वोटिंग और पार्टी गतिविधियों से असली तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल एकता का यह संकेत जनता, पार्टी व विरोध दोनों के लिए राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद जगाता है।

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